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चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत, हाई कोर्ट का फैसला रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता हो जाए तो धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दोषसिद्धि बरकरार नहीं रह सकती हैं.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation

चेक बाउंस के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चेक बाउंस के मामले में समझौते के बाद सजा से बचा जा सकता है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि एक बार समझौता ही जाने के बाद धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दोषसिद्धि बरकरार नहीं रह सकती. सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें समझौते के बावजूद दोषसिद्धि को खत्म करने से इनकार कर दिया था.

कानूनी सवाल यह था कि क्या चेक बाउंस के मामले को दोषसिद्धि को उस समझौते के आधार पर पलटा जा सकता है, जो शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच अभी निचली अदालतों, यहां तक कि हाई कोर्ट द्वारा दोषसिद्धि की पुष्टि के बाद हुआ हो. सुप्रीम कोर्ट ने इसका जवाब देते हुए याचिकाकर्ता को बरी कर दिया है.

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द

दरअसल हरपाल सिंह नामक व्यक्ति ने ज्ञान चंद गर्ग  (अपीलकर्ता) को पांच लाख रुपए उधार दिया था. गर्ग ने चेक के जरिए वापस करने के लिए चेक दिया, लेकिन वह बाउंस हो गया. मामला निचली अदालत गया और अदालत ने 21 अप्रैल 2010 को दोषी करार देते हुए छह माह की साधारण कारावास और 1 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था. मामला पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट पहुचा और हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट के फैसले के बाद दोनों के बीच 6 अप्रैल 2025 को समझौता हो गया. जिसके बाद गर्ग ने हाई कोर्ट में संशोधन की मांग को लेकर याचिका दायर किया, लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा, जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया है.

बता दें कि भारत में जब किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया चेक पैसों की कमी या अन्य कारण से अस्वीकार कर दिया जाता है कि इसे चेक एक अपमान कहा जाता है. विशेष रूप से चेक डिसऑनर के मामलों से संबंधित है. यह धारा उस स्थिति को मानती है, जब चेक का उपयोग किसी कर्ज या देनदारी को चुकाने के लिए किया गया हो, लेकिन वह चेक अदा नहीं किया जाता. यदि चेक डिसऑनर होता है तो व्यक्ति जिसे चेक दिया गया था, वह धारा 138 के तहत अपराधी के खिलाफ शिकायत कर सकता है. ऐसे मामले में आरोपी पर जुर्माना या सजा हो सकती है, जो मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है.



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