कोर्ट ने राज्यों से अनुबंध के आधार पर भी भरने को कहा है. सीजेआई बी. आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह निर्देश दिया है. ताकि प्रदूषण की समस्या का समाधान हो सकें.
पराली को लेकर राज्य क्यों नहीं बना रहा योजनाएं
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि हरियाणा के मुख्य सचिव ने हलफनामा दाखिल किया है. सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार योजनाएं क्यों नहीं बनाती? मैंने अखबार में पढ़ा है कि पराली जलाई जा रही है, इसका इस्तेमाल ईंधन के लिए किया जा सकता है.
सीजेआई ने कहा कि हम इसे पांच साल की प्रक्रिया नहीं बना सकते. किसान विशेष है और उनकी बदौलत खा रहे है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम पर्यावरण की रक्षा नहीं कर सकते, जैसा कि आप देख रहे है. वही एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद अगले सप्ताह सुनवाई की जाए, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.
सीजेआई ने राज्य सरकार को दी चेतावनी
मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने कहा कि पिछले साल पराली जलाने की घटना कम हुई है. और आने वाले समय में और कमी आने की उम्मीद है.
उन्होंने कोर्ट को बताया कि पिछले तीन साल में बहुत कुछ हासिल किया हुआ है और आने वाले समय में बहुत कुछ हासिल करेंगे. इसपर सीजेआई ने कहा कि आप कुछ दंडात्मक कार्रवाई के बारे में क्यों नहीं सोचते हैं. अगर पर्यावरण संरक्षण का आपका सच्चा इरादा है तो फिर इसमें संकोच क्यों? सीजेआई ने चेतावनी देते हुए कहा कि आप फैसला लीजिए, वरना हम आदेश जारी कर देंगे.
इसपर राहुल मेहरा ने कहा कि पहले भी गिरफ्तारियां हुई है और कार्रवाई भी हुई है, लेकिन गिरफ्तार लोगों में अधिकतर छोटे किसान है. कुछ के पास तो बहुत कम जमीन है. अगर आप गिरफ्तार कर जेल में डाल देंगे तो उनके आश्रितों का क्या होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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