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सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता, अब एक देश पर हमला माना जाएगा दूसरे पर अटैक

पाकिस्तान और सऊदी अरब ने आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत किसी एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा. यह कदम दोनों देशों की साझा सुरक्षा प्रतिबद्धता और रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा देता है.

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Pak-Saudi Mutual Defence Deal: सऊदी अरब और परमाणु ताकत से लैस पाकिस्तान ने बुधवार को एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाते हुए एक औपचारिक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते को लेकर दोनों देशों की सरकारों ने साफ कर दिया है कि यह केवल कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि भविष्य की सुरक्षा रणनीति की दिशा तय करने वाला एक ठोस कदम है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी बयान में दो टूक कहा गया है कि अगर किसी तीसरे देश की ओर से सऊदी अरब या पाकिस्तान पर हमला होता है, तो इसे दोनों देशों के खिलाफ आक्रमण माना जाएगा. यानी अब अगर कोई एक देश पर हमला करता है, तो दूसरा देश उसके बचाव में खड़ा होगा.

रियाद यात्रा के दौरान हुआ समझौता

यह अहम समझौता तब हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ रियाद की राजकीय यात्रा पर पहुंचे. वहाँ अल-यममाह पैलेस में उनका गर्मजोशी से स्वागत खुद सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने किया.

इसके बाद दोनों नेताओं की मौजूदगी में ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते’ (Strategic Mutual Defence Agreement) पर औपचारिक हस्ताक्षर हुए. यह समझौता दशकों से चली आ रही भाईचारे और इस्लामी एकजुटता की साझेदारी को नई मजबूती देता है.

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क्या है इस समझौते का मकसद?

इस समझौते का मूल उद्देश्य है- द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और गहरा करना, सैन्य क्षमताओं को साझा करना, और यदि जरूरत पड़े तो किसी भी तरह के बाहरी हमले के खिलाफ संयुक्त रूप से जवाब देना.

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक शांति को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है. दोनों देशों ने एक स्वर में कहा कि वे न सिर्फ अपनी-अपनी सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की भी साझा जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं.

आठ दशक पुरानी दोस्ती को नई दिशा

गौरतलब है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते करीब आठ दशकों से दोस्ताना और रणनीतिक रहे हैं. लेकिन इस रक्षा समझौते ने दोनों देशों की साझेदारी को अब एक सैन्य गठबंधन की शक्ल दे दी है.

अब देखना होगा कि इस समझौते का आने वाले समय में मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिति पर क्या असर पड़ता है. खासकर ऐसे समय में जब दुनियाभर में सुरक्षा, आतंकवाद, और भू-राजनीति को लेकर हलचल बढ़ रही है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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