नाबालिग लड़के के अपहरण के मामले में तमिलनाडू के केवी कुप्पम के विधायक जगन मूर्ति को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने जगन मूर्ति को अग्रिम जमानत को नियमित जमानत में तब्दील कर दिया है. जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. मद्रास हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी.
कोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए शर्त लगाते हुए कहा था कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ नही करेंगे, गवाहों को प्रभावित नही करेंगे और जांच में सहयोग करेंगे. कोर्ट लगाई गई शर्तो को बरकरार रखा है. जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत का उद्देश्य यह देखना है कि लड़का और लड़कीं सुरक्षित रहें और समाज में सामंजस्य बना रहे.
अदालत ने कहा कि अपहृत युवक बरामद हो चुका है और वह विधायक की गिरफ्त से नहीं मिला. जस्टिस मनोज मिश्रा ने कहा कि ऐसे मामलों में राजनीतिक व्यक्तियों को झूठे फंसाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि नकद बरामदगी अपने आप में निर्णायक सबूत नहीं है.
हाईकोर्ट ने विधायक की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज
मामले की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अमित आनंद तिवारी ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामला बेहद गंभीर है और उम्रकैद की सजा हो सकती है. उन्होंने दलील दी कि सीसीटीवी फुटेज समेत कई अहम साक्ष्य विधायक के खिलाफ है. बता दें कि थिरुवल्लुर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है. लक्ष्मी नाम की महिला के बड़ा बेटा कथित रूप से एक लड़की के.साथ भाग गया था.
लक्ष्मी ने आरोप लगाया गया है कि लड़कीं के परिवार के लोग कुछ बदमाशों के साथ मिल कर उसके घर पहुचे और बड़े बेटे की तलाश की. जब वह नही मिला तो उसके छोटे बेटे का अपहरण कर लिया और बाद में घायल अवस्था में एक होटल के पा छोड़ दिया. हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया सबूतों के हवाला देते हुए अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया.
ये भी पढ़ें- दिल्ली हाई कोर्ट ने DUCSU चुनाव में 75 फीसदी से कम एटेंडेंस वाले छात्रों को नामांकन से रोका
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



