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तेलंगाना के पूर्व SIB प्रमुख टी. प्रभाकर राव को SC ने ट्रायल में सहयोग करने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट फोन टैपिंग मामले में तेलंगाना के पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी. प्रभाकर राव को मिली अंतरिम जमानत के खिलाफ दायर तेलंगाना सरकार की याचिका पर 8 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. राज्य सरकार की ओर से याचिका दायर कर अंतरिम जमानत को रद्द करने की मांग की है.

Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट फोन टैपिंग मामले में तेलंगाना के पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी. प्रभाकर राव को मिली अंतरिम जमानत के खिलाफ दायर तेलंगाना सरकार की याचिका पर 8 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. राज्य सरकार की ओर से याचिका दायर कर अंतरिम जमानत को रद्द करने की मांग की है.

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रभाकर राव ट्रायल में सहयोग नही कर रहें है. जबकि प्रभाकर राव की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे 15 बार ट्रायल में शामिल हो चुके हैं.

प्रभाकर राव को मिली राहत

कोर्ट ने प्रभाकर राव को ट्रायल में सहयोग करने का आदेश दिया है. बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की पीठ ने यह आदेश दिया है. पिछले दिनों कोर्ट ने प्रभाकर राव को राहत दे दिया था. कोर्ट ने टी. प्रभाकर राव को अंतरिम सुरक्षा प्रदान करते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की कड़ी कार्रवाई पर रोक लगा दिया था.

कोर्ट ने फोन टैपिंग मामले में तेलंगाना के पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी. प्रभाकर राव को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था और कहा था उनका पासपोर्ट उन्हें उपलब्ध कराया जाए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पासपोर्ट जारी होने के तीन दिन के भीतर भारत लौटने को कहा था. फोन टैपिंग मामले में मुख्य आरोपी राव ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

फोन टैपिंग का आरोप

बता दें कि हैदराबाद के निचली अदालत ने 22 मई को राव के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि यदि राव 20 जून तक अदालत में पेश नहीं होते हैं तो उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा सकता है. एसआईबी के निलंबित डीएसपी समेत चार पुलिस अधिकारियों को हैदराबाद पुलिस ने मार्च 2024 में गिरफ्तार किया था. इन पर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से खुफिया जानकारी मिटाने और पिछली बीआरएस सरकार के दौरान फोन टैपिंग का आरोप है.

बाद में इन्हें जमानत मिल गई थी. पुलिस के अनुसार आरोपी एक षडयंत्र का हिस्सा थे, जिसमें उन्होंने एसआईबी की संसाधनों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किया.

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-भारत एक्सप्रेस



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