हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) एवं बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) से कहा कि वे दिवंगत वकीलों के परिवार को आर्थिक तंगी से निजात दिलाने के लिए एक नीति बनाए.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने दोनों निकायों से अनुरोध किया कि वे दिवंगत वकील की पत्नी जैसे अपीलकर्ता को आर्थिक तंगी को कम करने के लिए नीति बनाए जिससे उनके परिवार को घोर गरीबी का सामना न करना पड़े. क्योंकि उनके आय का एकमात्र साधन वकालत ही होता है. वकील के दिवंगत होने के बाद उनके परिवार के पास कोई वित्तीय सहायता नहीं होती है.
पीठ ने सरकार के तर्क को रखा बरकरार
पीठ ने यह निर्देश एक दिवंगत वकील की मां की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया, जिन्होंने अपने बेटे की मृत्यु के बाद मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना (सीएमएडब्ल्यूएस) के तहत 10 लाख के जीवन बीमा के भुगतान के लिए अदालत का रु ख किया था. दिल्ली सरकार ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि बीमा कवरेज पॉलिसी के सक्रिय होने पर निर्भर करता है. वकील की मृत्यु उससे पहले ही हो चुकी है. मां ने फिर कोर्ट में इसके लिए याचिका दाखिल की. एकल पीठ ने सरकार के इस तर्क को बरकरार रखा. मां ने फिर दो सदस्यीय पीठ के समक्ष अपील दाखिल की थी. जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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