भारतीय रेलवे की शान और महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी Surekha Yadav इस महीने रिटायर्ड हो रही हैं. सुरेखा यादव वो नाम है जिसने एशिया की पहली महिला लोको पायलट बनकर इतिहास रच दिया. 36 साल तक रेलवे में सेवा देने के बाद अब उन्होंने विदाई ली और रेलवे की तरफ से उन्हें खास सम्मान भी दिया गया.
कौन हैं सुरेखा यादव?
महाराष्ट्र के सतारा जिले की रहने वाली सुरेखा एक किसान परिवार से आती हैं. उनके पिता किसान थे और घर की आर्थिक स्थिति भी बहुत सामान्य थी. लेकिन सुरेखा ने कभी हालात को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया. उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और साल 1989 में भारतीय रेलवे से जुड़ गईं. अगले ही साल यानी 1990 में वे सहायक चालक बनीं और इसी के साथ एशिया की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर का गौरव हासिल किया.
उस दौर में ट्रेन चलाना पूरी तरह पुरुषों का काम माना जाता था. लेकिन सुरेखा ने अपने काम से ये साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी क्षेत्र महिलाओं के लिए बंद नहीं होता. उन्होंने कई नई जिम्मेदारियां संभालीं और धीरे-धीरे रेलवे में अपनी अलग पहचान बना ली.
हजारों महिलाओं को संदेश
सुरेखा ने न सिर्फ ट्रेनों को चलाया बल्कि हजारों महिलाओं को ये संदेश भी दिया कि सपनों को पूरा करने के लिए हिम्मत और मेहनत सबसे बड़ा हथियार है. उनकी कहानी आज भी लाखों लड़कियों को प्रेरणा देती है कि चाहे हालात जैसे भी हों, अगर जज्बा हो तो मंजिल जरूर मिलती है.
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अब जब सुरेखा यादव रिटायर हो रही हैं, तो पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा है. भारतीय रेलवे ने उन्हें सम्मानित कर उनके योगदान को यादगार बना दिया है. सुरेखा की ये यात्रा सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक मिसाल है जो आने वाली पीढ़ियों को रास्ता दिखाती रहेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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