समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड के मामले में दायर याचिका को जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने खारिज कर दिया है. अब्दुल्ला आजम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद निचली अदालत के एमपी/एमएलए कोर्ट में मुकदमे में सुनवाई शुरू हो जाएगी. अब्दुल्ला आजम खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो अलग-अलग मामलों में याचिकाएं दाखिल की थी. पहला मामला फर्जी पासपोर्ट से जुड़ा था, जबकि दूसरा मामला दो पैन कार्ड बनवाने से जुड़ा है.
ट्रायल को रद्द करने की मांग
दोनों ही मामलों में अब्दुल्ला आजम खान ने याचिकाएं दाखिल कर रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे ट्रायल को रद्द करने की मांग की थी. गलत जन्मतिथि पर फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 30 जुलाई 2019 को अब्दुल्ला आजम के खिलाफ गलत दस्तवेज़ों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का मुकदमा रामपुर के सिविल लाइन थाने में आईपीसी की धारा 468, 420, 471, 467 और भारतीय पासपोर्ट अधिनियम 1920 की धारा 12 (1) (A) के तहत मुकदमा दर्ज कराया था.
गलत दस्तावेज़ों से पासपोर्ट बनवाने का आरोप
अब्दुल्ला आजम पर गलत दस्तावेज़ों से पासपोर्ट बनवाने का आरोप है. आरोप है कि अब्दुल्ला आजम के शैक्षिक प्रमाण पत्र और पासपोर्ट विभाग को दी गई जानकारी अलग-अलग है. शिकायतकर्ता के अनुसार अब्दुल्ला आजम को 10 जनवरी 2018 को पासपोर्ट संख्या जेड 4307442 जारी हुआ था. पासपोर्ट में अब्दुल्ला आजम की जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 बताई गई है जबकि शैक्षिक प्रमाण पत्रों में जन्मतिथि जनवरी 1993 है.
दूसरे मामले में बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने अब्दुल्ला आजम खान और सपा नेता आजम खान के खिलाफ 6 दिसंबर 2019 को रामपुर के सिविल लाइन थाने में दो पैन कार्ड रखने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना का कहना था कि अब्दुल्ला आजम ने 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी शपथ पत्र में गलत पैन नंबर दर्ज किया था.
ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम मतदाता सूची से बाहर रखें गए 3.66 लाख मतदाताओं का मांगा ब्यौरा
भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

