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सुप्रीम कोर्ट से आशीष मिश्रा को दिवाली पर राहत, कोर्ट ने गवाहों को धमकाने के मामले की जांच DSP को सौंपी

सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. अब परिवार और बच्चों के साथ दीवाली मना सकते है. कोर्ट ने आशीष मिश्रा को कुछ शर्तों के साथ दीवाली में घर जाने की अनुमति दे दी है.

Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. आशीष मिश्रा  अब अपने परिवार और बच्चों के साथ दीवाली मना सकते है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ की ने आशीष मिश्रा को कुछ शर्तों के साथ दीवाली में घर जाने की अनुमति दे दी है.

गवाहों को धमकाने का आरोप

कोर्ट ने कहा 20 अक्टूबर घर जाएंगे 22 अक्टूबर को वापस आएंगे. साथ ही कोर्ट ने गवाहों को धमकाने और प्रभावित करने के आरोपों की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी से कराने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि एक गवाह पर दबाव डालने की शिकायत की प्राथमिक जांच में दबाव की बात सामने आने के बाद एफआईआर दर्ज किया जा चुका है.

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि चूंकि प्रारंभिक जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी ने किया था, इसलिए बेहतर होगा कि वही अधिकारी या उनके समकक्ष रैंक का कोई अधिकारी आगे की जांच करें.

शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नहीं

पिछली सुनवाई में शिकायतकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि धमकी मिलने की शिकायत करने के बावजूद आज तक न तो कोई कार्रवाई हुई और ना ही एफआईआर दर्ज किया गया. जबकि ललिता कुमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि शिकायत मिलने के एक सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज होने चाहिए. लेकिन डेढ़ महीने बाद भी एफआईआर दर्ज नही हुआ है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील से कहा था कि जमानत शर्तो का सख्ती से पालन करना होगा.

मुकदमे के स्थान पर जाने की अनुमति

वहीं पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को मिश्रा को जमानत दी थी. साथ ही जमानत की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया था और उन्हें तय तारीख से केवल एक दिन पहले अपने मुकदमे के स्थान पर जाने की अनुमति दी थी. लेकिन वह एक अक्टूबर को (लखीमपुर खीरी) ऐसे गए जैसे दो अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश वाले दिन सुनवाई हो. जबकि अगले दिन अदालत बंद थी और उन्होंने एक अक्टूबर को एक विशाल सार्वजनिक रैली को संबोधित किया.

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-भारत एक्सप्रेस



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