Bihar Election: विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो चुकी है लेकिन विपक्षी महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अब भी सहमति नहीं बन सकी है. कांग्रेस, RJD, VIP और अन्य दलों के बीच खींचतान जारी है. इस बीच VIP प्रमुख मुकेश सहनी का बयान कि ‘महागठबंधन बीमार है और डॉक्टर दिल्ली में हैं’ ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है.
कांग्रेस की सख्ती और कृष्णा अल्लावरू की रणनीति
कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू इस बार कोई समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. उनका साफ कहना है कि कांग्रेस को खोने के लिए कुछ नहीं है लेकिन पाने के लिए बहुत कुछ है. इसलिए पार्टी 65 सीटों की मांग पर अड़ी है जबकि RJD 53-55 सीटें देने को तैयार है. यह 10 सीटों का अंतर ही महागठबंधन की सबसे बड़ी परेशानी बन गया है.
कृष्णा अल्लावरू का मानना है कि अगर कांग्रेस कम सीटों पर लड़ेगी तो उसका जनाधार और वोट शेयर सिकुड़ जाएगा. इसलिए वह मोल-तोल कर रहे हैं और झुकने को तैयार नहीं है. कांग्रेस का फोकस 2025 से ज्यादा 2029 पर है जब वह खुद मुख्यमंत्री पद की दावेदारी कर सकती है.
लालू फैमिली और राहुल गांधी की मुलाकात
इसी बीच दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में राबड़ी देवी, लालू यादव और तेजस्वी यादव की पेशी है. इसके बाद इनकी राहुल गांधी से मुलाकात तय है. माना जा रहा है कि इसी बैठक में सीट बंटवारे का अंतिम फैसला होगा. कांग्रेस की ओर से डॉ. अखिलेश सिंह मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं जिनके लालू परिवार से अच्छे संबंध भी है.
मुकेश सहनी की नाराजगी और मांग
मुकेश सहनी इस पूरे घटना से खासे नाराज है. वह कम से कम 30 सीटों की मांग कर रहे हैं और उपमुख्यमंत्री पद की भी दावेदारी कर रहे हैं. हालांकि महागठबंधन में तीन उपमुख्यमंत्री की बात को कई नेता खारिज कर चुके हैं. सहनी को डर है कि 2020 की तरह इस बार भी उन्हें नजरअंदाज किया जा सकता है. उनकी चिंता तब और बढ़ गई जब आईपी गुप्ता की पान पार्टी की महागठबंधन में एंट्री हुई. तेजस्वी यादव के साथ लंच और कांग्रेस से संपर्क ने मुकेश सहनी की स्थिति को और कमजोर कर दिया है.
कांग्रेस का प्लान B
कांग्रेस का मानना है कि RJD सीट बंटवारे को अंतिम समय तक खींचेगी. इसलिए पार्टी ने तय किया है कि अगर समय रहते समझौता नहीं हुआ तो वह अपने मजबूत क्षेत्रों में सीधे उम्मीदवार उतार देगी. इससे महागठबंधन में और दरार पड़ सकती है.
एनडीए की स्थिति और सहनी के विकल्प
NDA ने पहले ही सीटों का बंटवारा कर दिया है. बीजेपी और JDU 101-101 सीटों पर लड़ेंगे जबकि बाकी सहयोगियों को 40 सीटें दी गई हैं. ऐसे में मुकेश सहनी के पास विकल्प सीमित हैं. बीजेपी या JDU उन्हें कितनी सीटें देंगी यह स्पष्ट नहीं है. हालांकि कुछ दिन पहले नीतीश कुमान से उनकी मुलाकात हुई थी लेकिन इसका असर अभी तक नहीं दिखा.
क्या राहुल गांधी करेंगे समाधान?
अब सारी निगाहें राहुल गांधी पर टिकी हैं. महागठबंधन के भीतर की बीमारी का इलाज वही कर सकते हैं. अगर आज की बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो कांग्रेस अपने रास्ते पर चल सकती है और मुकेश सहनी भी अलग राह पकड़ सकते हैं.
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बिहार चुनाव में महागठबंधन की एकता सबसे बड़ी चुनौती बन गई है. 10 सीटों का पेंच, डिप्टी सीएम की मांग, नए दलों की एंट्री और कांग्रेस की सख्ती ने समीकरण को उलझा दिया है. आज का दिन निर्णायक हो सकता है. अगर राहुल गांधी सभी दलों को एक मंच पर लाने में सफल होते हैं तो महागठबंधन एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतर सकता है. वरना सीटों की लड़ाई, गठबंधन की सेहत पर भारी पड़ सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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