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सुप्रीम कोर्ट में ऑनलाइन सट्टेबाजी पर प्रतिबंध की मांग, केंद्र और राज्यों को सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की याचिका दायर

ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए पर रोक लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका दायर की गई है.

Supreme Court on Shivsena Symbol Row

ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और जनहित याचिका दायर की गई है. जिस पर जल्द सुनवाई की मांग को लेकर याचिकाकर्ता के वकील विराग गुप्ता ने सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई. जिस पर कोर्ट ने जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है. दायर जनहित याचिका में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे ऑनलाइन बेटिंग और जुए के खेलों को पूरी तरह प्रतिबंधित करें और कठोर कार्रवाई की मांग की गई है.

यह जनहित याचिका सीएएससी और अधिवक्ता शौर्या तिवारी की ओर से दायर की गई है. दायर जनहित याचिका में आईटी एक्ट की धारा 69 A के तहत सभी अवैध बेटिंग और जुआ खेलने पर तुरंत रोक लगाई जाए. याचिका में कहा गया है कि बैंकिंग और यूपीआई ट्रांजेक्शन को रोकने के निर्देश दिए जाएं ताकि इन एप्स पर पैसों का लेनदेन न हो. गूगल और एप्पल प्ले स्टोर को उन्हीं गेमिंग की अनुमति दी जाए जिन्हें केंद्र सरकार से लाइसेंस मिला हो.

समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा

दायर याचिका में कहा गया है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के ई स्पोर्ट्स या मनी गेम्स में भाग लेने से रोका जाए और सीबीआई, ईडी और इंटरपोल की मदद से विदेशी कंपनियों से करीब 2 लाख करोड़ रुपये टैक्स वसूली की जाए. याचिकाकर्ता के वकील विराग गुप्ता के मुताबिक भारत में करीब 65 करोड़ लोग ऑनलाइन गेमिंग में शामिल हैं, जिससे सालाना 1.8 लाख करोड़ रुपये का कारोबार कर रहा हैं.

लगभग आधी आबादी इन खेलों की लत में फंस चुकी है, जिससे समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य पुलिस छोटे लोगों को पकड़ रही हैं, जबकि केंद्र सरकार ऑनलाइन जुए के बड़े कारोबारियों पर कार्रवाई करने में नाकाम रही हैं. याचिका में यह भी कहा गया है कि बड़े फिल्मी सितारे और क्रिकेटर इन अवैध ऐप्स का प्रचार कर रहें हैं, जिससे युवा वर्ग प्रभावित हो रहा है और मानसिक तनाव, लत और आत्महत्याएं बढ़ रही हैं.

याचिककर्ताओ के मुताबिक यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या देश के सामाजिक ढांचे को कमजोर कर देगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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