देश भर के संस्थानों में महिलाओं की गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता के व्यापक उल्लंघन के खिलाफ तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है. जस्टिस बी. वी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ अगले सप्ताह इस मामले में सुनवाई करेगा.
अन्य राज्यों में भी हो चुकी ऐसी घटनाएं
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बी. वी नागरत्ना ने कहा कि यदि कोई कह रहा है कि इस वजह से भारी काम नहीं किया जा सका, तो इसे स्वीकार किया जा सकता था और किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता था. हमें उम्मीद है कि इस याचिका के माध्यम से कुछ अच्छा रिजल्ट निकलेगा. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस तरह की घटनाएं अन्य राज्यों में भी हो चुकी है.
महिलाओं की निजता की रक्षा में दिशानिदेशों की मांग
जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अब मैं सोच रही थी कि क्या छुट्टी लेने के लिए उनसे यह साबित करने को कहा जाएगा कि वे पीरियड्स में है? दायर याचिका में महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान उनकी निजता और गरिमा को ठेस पहुचाने के विभिन्न मामलों का हवाला देते हुए महिलाओं की निजता की रक्षा के लिए दिशानिदेशों जारी करने की मांग की है.
एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड प्रज्ञा बघेल के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि राज्यपाल के दौरे के कारण विश्वविद्यालय में कर्मचारियों को अस्वस्थ्य होने के बावजूद ड्यूटी पर बुलाया गया और सैनिटरी पैड की तस्वीरें लेने तक उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, उनका अपमान किया गया और उनपर दबाव डाला गया.
विश्विद्यालय के तीन लोगों पर यौन उत्पीड़न का आरोप
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में महिला सफाई कर्मियों से हुए दुर्व्यवहार के मामले की न्यायिक जांच और दिशा निर्देश देने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने याचिका दायर की है. विश्विद्यालय के तीन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने महिला सफाई कर्मियों से उनके प्राइवेट पार्ट की तस्वीरें मांगी, ताकि यह साबित हो सके कि उन्हें मासिक धर्म हो रहा है. घटना सामने आने के बाद विश्विद्यालय ने आरोपियों को निलंबित कर दिया हैं.
वहीं, पुलिस ने आपराधिक धमकी, यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा को ठेस पहुचाने का इरादा और महिला पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग के आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की है. एससीबीए द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह घटना महिलाओं की गरिमा, निजता और शरीर की स्वायत्तता पर गंभीर आघात हैं.
याचिका में हरियाणा सरकार के अलावा केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाया गया है. याचिका में यह भी कहा गया है कि भविष्य में दोबारा घटना न घटे इसके लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की हैं. ताकि कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थाओं में महिलाओं की स्वास्थ्य, गरिमा और निजता की रक्षा हो सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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