UK freezes Gurpreet Rehal Assets: भारत के दबाव का असर ब्रिटेन में दिखने लगा है. ब्रिटेन की सरकार ने अब भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल खालिस्तानी समूहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी शुरू कर दी है. ब्रिटेन ने खालिस्तानी गुरप्रीत सिंह रेहल की संपत्ति फ्रीज करने की घोषणा की है. साथ ही उसे निदेशक अयोग्यता (डायरेक्टर डिसक्वालिफिकेशन) भी करार दिया है.
गुरप्रीत सिंह रेहल पर आतंकी संगठनों से जुड़े होने के अक्सर आरोप लगते रहे हैं. ब्रिटेन के वित्त मंत्रालय, एचएम ट्रेजरी ने खालिस्तानी आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और समर्थन करने का आरोप लगाते हुए रेहल के खिलाफ कार्रवाई की है. गुरप्रीत सिंह रेहल और बब्बर अकाली लहर नाम के समूह के खिलाफ ब्रिटिश सरकार ने कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्ति फ्रीज करने की घोषणा की है.
सभी तरह के लेनदेन पर लगी रोक
इस प्रतिबंध की वजह से ब्रिटेन में कोई भी व्यक्ति या संस्था बब्बर अकाली लहर से जुड़े लोगों के पैसों या संपत्ति से किसी भी तरह का लेनदेन नहीं कर सकता. यानी उनके नाम पर रखे गए पैसे, बैंक खातों, संपत्ति या किसी भी आर्थिक संसाधन को न तो इस्तेमाल किया जा सकता है और न ही उन्हें कोई मदद दी जा सकती है. ब्रिटेन ने यह कार्रवाई काउंटर टेररिज्म (सैंक्शंस) (EU Exit) रेगुलेशंस 2019 नाम के कानून के तहत की है.
आदेश बदलने तक लागू रहेगा प्रतिबंध
ब्रिटेन के वित्त मंत्रालय की ओर से उठाये गए इस कदम के बाद बब्बर अकाली लहर से जुड़े लोगों को किसी भी तरह की वित्तीय सेवा, फंड या आर्थिक संसाधन उपलब्ध नहीं करा सकता. यह रोक उन सभी संस्थाओं पर भी लागू होगी जिनपर वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मालिकाना हक या नियंत्रण रखते हैं. आदेश तबतक लागू रहेगा जबतक एचएम ट्रेजरी अपना आदेश ना बदल दे.
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रेहल पर आतंकी संगठन से जुड़े होने का आरोप
बब्बर खालसा संगठन या बब्बर खालसा इंटरनेशन एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है. गुरप्रीत सिंह रेहल इससे जुड़ा हुआ पाया गया है. जिसको लेकर रेहल की कंपनियां जिसमें, सेविंग पंजाब सीआईसी, वाइटहॉक कंसल्चटेशंस लिमिटेड और अनइनकॉर्पोरेटेड संगठन लोहा डिजाइन्स पर भी ये प्रतिबंध लागू हो गया है. इनका उल्लंघन करने पर 7 साल कैद या 10 लाख पाउंड तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
एचएम ट्रेजरी ने बताया है कि रेहल आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है. खालसा और अकाली लहर पर आतंकवादी संगठनों को बढ़ावा देने संगठन में भर्ती या उन्हें आर्थिक सेवा देने और हथियार खरीदने के आरोप हैं. जिसको लेकर ब्रिटेन ने ये कार्रवाई की है.
-भारत एक्सप्रेस
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