दिल्ली हाई कोर्ट से दिल्ली के निजी स्कूलों को झटका लगा है. दिल्ली सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है. दिल्ली सरकार ने फीस पर लगाम लगाने को लेकर स्कूल लेवल कमेटी बनाने को लेकर अधिसूचना जारी किया था. जिसके खिलाफ दिल्ली के प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से याचिका दायर की गई थी.
दायर याचिका में दिल्ली सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की थी. हालांकि हाई कोर्ट ने पैनलों के गठन के लिए समय सीमा बढ़ा दिया है. मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि कमेटियां पहले से तय 10 जनवरी के जगह 20 जनवरी तक बनाई जा सकती है. साथ ही कोर्ट ने स्कूल मैनेजमेंट को फीस जमा करने की आखिरी तारीख 5 फरवरी तक बढ़ा दिया है. पहले यह काम 25 जनवरी तक करना था. दायर याचिका में दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस तय करने और रेगुलेशन में पारदर्शिता) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी.
निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगेगा अंकुश
दिल्ली सरकार ने राजधानी में निजी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढोत्तरी को लगाम लगाने के लिए दिल्ली स्कूल एजुकेशन ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस बिल 2025 लाया गया था. 1973 के दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियमों के साथ-साथ लागू होगा. सरकार द्वारा लाए गए यह कानून शिक्षा विभाग अधिनियम व नियमों में निर्धारित सभी प्रक्रियाओं जैसे स्कूलों से फीस प्रस्तावों की जांच, अनुमतियां, रिपोर्टिंग और निगरानी को लागू करना शुरू करेगा.
नए कानून में फीस निर्धारण और संशोधन की प्रक्रिया में अभिभवकों की अनिवार्य भागीदारी, स्कूलों द्वारा वित्तीय विवरण, खर्च, निधि उपयोग और फीस संरचना का अनिवार्य एवं सार्वजनिक खुलासा, स्पष्ट और मजबूत शिकायत नियंत्रण तंत्र, किसी भी अनधिकृत या अवैध फीस में बढ़ोतरी पर तुरंत कार्रवाई, फीस वृद्धि से पहले विस्तृत प्रक्रिया और सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक जैसी प्रमुख बातों को इसमें शामिल किया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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