आदित्य द्विवेदी/दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित भारत मंडपम (Bharat Mandapam) एक बार फिर भारतीय संस्कृति और आध्यात्म के भव्य संगम का साक्षी बना. जैन आचार्य लोकेश मुनि (Acharya Lokesh Muni) के ‘विश्व शांति मिशन’ के तहत मोरारी बापू की रामकथा का भव्य शुभारंभ हुआ. इस ऐतिहासिक आयोजन में सनातन और जैन परंपरा का अनूठा मिलन देखने को मिला, जिसका उद्देश्य दुनिया को युद्ध से मुक्त कर अहिंसा और करुणा के मार्ग पर लाना है.
देश-विदेश से जुटे श्रद्धालु
रामकथा के उद्घाटन समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की. दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देशों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. आचार्य लोकेश मुनि ने इस आयोजन को मानवता के लिए एक नई शुरुआत बताया. उन्होंने कहा-
‘हमारा उद्देश्य है कि दुनिया से युद्ध समाप्त हों और भगवान राम का अहिंसा का संदेश वैश्विक संवाद का आधार बने.’
‘सत्य, प्रेम और करुणा’ का मंत्र
प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू ने अपनी 971वीं रामकथा की शुरुआत करते हुए सनातन धर्म के मूल तत्वों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “जो बाहरी शत्रु को जीते वह वीर है, लेकिन जो भीतर के शत्रु को जीते वह महावीर है.” बापू ने जोर देकर कहा कि रामकथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव को भीतर से शुद्ध करने की प्रक्रिया है. उन्होंने सत्य, प्रेम और करुणा को ही जीवन का आधार बताया.
ये भी पढ़ें: ‘भ्रष्टाचारियों की पार्टी TMC, घुसपैठियों को बना रही वोटर…’, PM मोदी ने मालदा से ममता बनर्जी पर साधा निशाना
‘राम हर हृदय में हैं’
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीराम मंदिरों की दीवारों तक सीमित नहीं हैं, वे हर भारतीय के हृदय में निवास करते हैं. उन्होंने मोरारी बापू के 68 वर्षों के तपस्वी जीवन की सराहना की. वहीं, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि आज जब विश्व विश्वास के संकट से गुजर रहा है, तब रामकथा ही मानवता को सही मार्ग दिखा सकती है. परमार्थ निकेतन के संत रवि शंकर ने भी कहा कि सनातन धर्म ही विश्व शांति का एकमात्र रास्ता है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
