आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और ओवरथिंकिंग (अत्यधिक सोचना) एक गंभीर समस्या बन चुके हैं. ऐसे में आयुर्वेद की तीन शक्तिशाली औषधियां ब्राह्मी, अश्वगंधा और शंखपुष्पी मानसिक शांति के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. आयुष मंत्रालय भी इनके मिश्रण को मानसिक स्वास्थ्य के लिए रामबाण मानता है. जहां ब्राह्मी एकाग्रता बढ़ाती है, वहीं अश्वगंधा तनाव को नियंत्रित करता है और शंखपुष्पी मन को शांत कर गहरी नींद लाने में मदद करती है. आइए जानते हैं कि ये तीनों जड़ी-बूटियां मिलकर हमारे मस्तिष्क पर कैसे जादू जैसा असर करती हैं.
रोजमर्रा की जिंदगी में देता सुकून
ब्राह्मी मस्तिष्क को पोषण देती है, याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाती है. अश्वगंधा तनाव हार्मोन को नियंत्रित कर शरीर को मजबूत बनाती है. शंखपुष्पी मन को शांत रखती है और बेहतर नींद लाती है. ये तीनों मिलकर मानसिक स्वास्थ्य सुधारती हैं, नकारात्मक विचार कम करती हैं और भावनात्मक संतुलन बनाए रखती हैं. नियमित सेवन से मन शांत रहता है और रोजमर्रा की जिंदगी में सुकून मिलता है.
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, ब्राह्मी, शंखपुष्पी और अश्वगंधा का मिश्रण सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. ये तीनों आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल वेलनेस) को मजबूत बनाने में विशेष रूप से कारगर साबित होती हैं. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ओवरथिंकिंग, तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम समस्या बन गई है. इस मिश्रण का नियमित सेवन इन समस्याओं से राहत दिला सकता है.
प्राकृतिक ट्रैंक्विलाइजर की तरह करता काम
ब्राह्मी मस्तिष्क का टॉनिक है. यह याददाश्त, एकाग्रता और बुद्धि को बढ़ाती है. ब्राह्मी में मौजूद बैकोसाइड्स मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा करते हैं और न्यूरोट्रांसमीटर को संतुलित रखते हैं, जिससे चिंता और तनाव कम होता है. शंखपुष्पी मन को शांत करने वाली जड़ी-बूटी है. यह प्राकृतिक ट्रैंक्विलाइजर की तरह काम करती है, जो घबराहट, बेचैनी और ओवरथिंकिंग को दूर करती है. यह नींद की गुणवत्ता सुधारती है और भावनात्मक संतुलन बनाए रखती है.
अश्वगंधा एक शक्तिशाली एडाप्टोजेन है. यह कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को नियंत्रित करती है, जिससे शरीर और मन तनाव से बेहतर ढंग से निपट पाते हैं. यह ऊर्जा बढ़ाती है, थकान कम करती है और नींद में सुधार लाती है. तीनों का मिश्रण एक साथ मिलकर बेहतर काम करता है.
कैसे करें सेवन?
कई आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में ये तीनों साथ में इस्तेमाल होती हैं, जैसे चूर्ण या सिरप. आमतौर पर चूर्ण के रूप में समान अनुपात (1:1:1) में लिया जाता है. मिश्रण दिन में 2 बार गुनगुने दूध या पानी के साथ ले सकते हैं. अश्वगंधा का मिश्रण गुनगुने दूध या शहद के साथ सुझाया जाता है, लेकिन सही मात्रा और तरीका व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) पर निर्भर करता है, इसलिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेकर ही लें.
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-भारत एक्सप्रेस
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