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“जर्मनों को दबाकर रखो…” NATO का 77 साल पुराना नियम टूटा! हिटलर के बाद पहली बार महाशक्ति बनने की राह पर जर्मनी

Germany News: जर्मनी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद फिर से अपनी सेना पर खर्च को कई गुना बढ़ा दिया है. इससे पहले ऐसा तब हुआ था जब हिटलर ने अपनी सेना खड़ी की थी. एक बार फिर यूरोप की सबसे ताकतवर सेना बनाने के मिशन पर आगे बढ़ रहा है.

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साल था 1949, अप्रैल का महीना अभी शुरू ही हुआ था. दूसरे विश्वयुद्ध के खत्म हुए लगभग 4 साल हो रहे थे. इस विश्वयुद्ध में यूरोपीय देश तबाह हो चुके थे. यूरोप की धरती लगभग 3.65 करोड़ लोगों कब्रगाह में तब्दील हो हो चुकी थी. लेकिन यूरोपीय देशों को फिर से एक डर सता रहा था, वह था सोवियत संघ का! यूरोपीय देश अब किसी भी युद्ध को झेलने की स्थिति में नहीं थे. 4 अप्रैल के दिन यूरोप के 12 देशों के प्रतिनिधि वॉशिंगटन में जुटे और एक समझौते पर हस्ताक्षर किये और इस तरह से NATO का जन्म हुआ.

इस दौरान ब्रिटिश जनरल और नाटो के पहले महासचिव बने लॉर्ड इस्मे ने कहा, NATO में रूसियों को बाहर रखना, अमेरिकियों को अंदर रखना और जर्मनों को दबाकर रखना. लेकिन अब जर्मनी फिर से सिर उठा रहा है. हाल के सालों में उठाये गए कदम से यूरोपीय देशों में खौफ है. जर्मनी के अतीत को देखते हुए रूस तक के आंखों की नींद उड़ी हुई है. आखिर जर्मनी ऐसा क्या कर रहा है कि पुतिन को भी टेंशन हो गई है?

दो गुणा से ज्यादा बढ़ा रक्षा बजट

दरअसल जर्मनी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद फिर से अपनी सेना पर खर्च को कई गुना बढ़ा दिया है. इससे पहले ऐसा तब हुआ था जब हिटलर ने अपनी सेना खड़ी की थी. अल जजीरा की रिपोर्ट में बताया गया है कि जर्मनी एक बार फिर यूरोप की सबसे ताकतवर सेना बनाने के मिशन पर आगे बढ़ रहा है.

2.5 लाख रुपये महीने तक का ऑफर

जर्मन सरकार सेना के प्रति युवाओं को रिझाने के लिए मोटा ऑफर दे रही है. जो युवा सेना में भर्ती होंगे उन्हें प्रति महीने 2.5 लाख रुपये (2300 यूरो) तक की सैलरी की पेशकश की जा रही है. जर्मनी सेना (बुंडेसवेयर) में एक्टिव सैनिकों की संख्या नवंबर 2025 तक 1 लाख 84 हजार थी. जिसमें अब 25,000 की बढ़ोतरी हो गई है.

गौरतलब है कि मई 2025 में ही जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संसद में कहा था कि अब जर्मन सेना को यूरोप की सबसे मजबूत सेना बनाना होगा. जर्मनी ने साल 2035 तक अपनी एक्टिव सेना को 2 लाख 60 हजार करने का लक्ष्य रखा है. जिसमें 2 लाख रिजर्व सैनिक भी होंगे.

सेना के नियमों में किया गया बदलाव

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 की शुरुआत से ही जर्मनी में 18 साल के लड़कों को एक फॉर्म दिया जा रहा है. जिसमें उनसे पूछा जा रहा है कि वो सेना में जाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से कितने तैयार हैं.

यूरोप की रक्षा के प्रति अमेरिका के उदासीन रवैये और रूस के बढ़ते खतरे को देखते हुए जर्मनी ने एक नया कानून पास किया है. जिसमें नागरिकों से सेना में अपनी इच्छा से भर्ती होने का अधिकार छीन लिया गया है. अगर सरकार को जरूरत पड़ेगी तो युवाओं को जबरदस्ती सैन्य सेवा में लाया जा सकता है. यह कुछ-कुछ वैसा ही है जैसा हिटलर ने लागू किया था.

अंगारों के रास्ते पर क्यों चल रहा जर्मनी

जून 2025 में एक सर्वे में जब जर्मनी के लोगों से अमेरिका और नाटो के तहत जर्मनी की सुरक्षा के संबंध में पूछा गया तो 73 प्रतिशत लोगों ने अमेरिका और नाटो पर अपना ऐतराज जताया. जो कि मात्र 5 महीने के बाद ही बढ़कर 84 प्रतिशत हो गया. वहीं 90 प्रतिशत जर्मनों का मानना है कि यूरोप की राजनीति में अमेरिका का दखल काफी नुकसानदायक है. खासतौर पर तब जब अमेरिका खुलेआम दक्षिणपंथी सरकारों को समर्थन दे रहा है. इसकी वजह से यूरोप में कट्टरपंथी पार्टियां मजबूत हो रही हैं.

अमेरिका पर जर्मनों का भरोसा लगातार गिरता जा रहा है. अब 10 में से 6 जर्मन अमेरिकी परमाणु सुरक्षा पर भी भरोसा नहीं करते. उनका भरोसा तब और ज्यादा कम हो गया जब ट्रंप से नाटो पर हमले के संबंध में पूछा गया. जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका इसकी गारंटी नहीं देता.

रूस के चलते जर्मनी बढ़ा रहा ताकत

साल 2022 में रूस का यूक्रेन पर हमला जर्मनी को भयभीत कर दिया. जर्मन सरकार ने सेना पर खर्च 48 अरब डॉलर से बढ़ाकर 120 अरब डॉलर कर दिया है. ये पैसे सेना के लिए नए हथियार, उपकरण और अन्य सुविधाओं पर खर्च किए जाएंगे.

जर्मनी में नाजी इतिहास को देखते हुए लोग सेना को दक्षिणपंथी झुकाव वाला पेशा मानते हैं. नाजी जर्मनी के बुजुर्गों के लिए अमेरिका के बिना रूस से युद्ध एक डरावना सपने जैसा है.

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जर्मन अमेरिका से मांग रहे स्वतंत्रता

हालांकि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जर्मन लोगों की सोच तेजी से बदली है. जर्मनी के मौजूदा चांसलर मर्ज अमेरिका के आलोचक हैं और रक्षा क्षेत्र में अमेरिका से स्वतंत्रता की मांग करते हैं.

मर्ज ने इसके लिए जर्मनी के संविधान में भी फेरबदल किया है. उन्होंने संविधान के उस आर्टिकल को अस्थाई रूप से हटा दिया है जिसमें सरकार पर कर्ज लेने की सीमा बताई गई है. जर्मन सरकार अब कर्ज लेकर अपनी सेना पर खर्च कर सकती है. इसका अर्थ हुआ अब जर्मन सेना को बढ़ाने में पैसों की कमी नहीं होगी.

-भारत एक्सप्रेस



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