चुनावी रणनीतिकार व राजनेता प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. जिसकी याचिका पर सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ 6 फरवरी को सुनवाई करेगी. दायर याचिका में चुनाव रद्द करने की मांग की है. दायर याचिका में कहा गया है कि चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू थी, तब राज्य सरकार ने कथित तौर पर महिला मतदाताओं के खातों में 10000 ट्रांसफर किए.
दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के नाम पर 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को यह राशि ट्रांसफर किया गया. याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ना और उन्हें आदर्श आचार संहिता के दौरान भुगतान करना गलत था.
संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के उल्लंघन का आरोप
यह संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 सहित जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों का उल्लंधन है. पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण) के तहत आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए. साथ ही दायर याचिका में मतदान केंद्रों पर जीविका स्वयं सहायता समूहों की लगभग 1.8 लाख महिलाओं की तैनाती को भी चुनौती दी है. पार्टी ने यह तर्क दिया है कि उनकी उपस्थिति गैरकानूनी थी और इसने चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को और कमजोर किया है. जनसुराज ने 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में 243 सीटों में से 242 पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट जितने में नाकाम रही थी.
दायर याचिका में चुनाव आयोग और बिहार सरकार दोनों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. जन सुराज पार्टी ने मांग की है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से कम से कम छह माह पहले तक ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए नियुन्तम समय सीमा तय करने की मांग की है.
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-भारत एक्सप्रेस
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