Akasa Air: लो-कॉस्ट एयरलाइन अकासा एयर के मुंबई स्थित दफ्तर में हाल ही में GST विभाग की टीम ने छापेमारी की है. साथ ही कंपनी के CEO विनय दुबे को मुंबई बेस छोड़ने से मना किया है. उधर कंपनी ने साफ किया है कि यह कोई छापा या कार्रवाई नहीं, बल्कि जांच प्रक्रिया का हिस्सा था.
अकासा एयर की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मुंबई GST विभाग के अधिकारी नियमित कारोबारी सत्यापन के तहत उनके कार्यालय आए थे. कंपनी का कहना है कि एविएशन जैसे कड़े नियमों वाले सेक्टर में ऐसी जांच आम बात है.
एयरलाइन ने यह भी बताया कि वह टैक्स से जुड़े सभी नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन करती है और विभाग द्वारा मांगी गई हर जानकारी देने में पूरा सहयोग कर रही है.
इस GST विजिट के बाद एयरलाइन इंडस्ट्री में चल रही कुछ पुरानी चर्चाएं फिर सामने आई हैं. खासतौर पर विमान खरीदने और फिर उन्हें लीज पर देने (सेल-एंड-लीजबैक) की व्यवस्था और उस पर लगने वाले टैक्स को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
बहुत खर्चीला है एयरलाइन कारोबार
जानकारों का कहना है कि एयरलाइन कारोबार बहुत खर्चीला होता है. ईंधन, विमान लीज, रखरखाव और नए रूट शुरू करने में भारी पैसा लगता है. इसी वजह से ज्यादातर एयरलाइंस शुरुआती सालों में घाटे में रहती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक घाटा होना हमेशा किसी कंपनी की खराब हालत का संकेत नहीं होता, बल्कि यह विस्तार की प्रक्रिया का हिस्सा भी हो सकता है.
घाटा हमेशा घाटा नहीं होता!
इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कई बार एयरलाइंस लीजबैक से होने वाली कमाई को अपने घाटे के साथ एडजस्ट कर टैक्स का बोझ कम करने की कोशिश करती हैं. हालांकि, अब तक नियामकों की ओर से ऐसे आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
ये भी पढ़ें- स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, राहुल गांधी ने क्यों नहीं किया साइन? कांग्रेस ने बताई वजह
अकासा एयर ने दोहराया है कि GST विभाग की यह विज़िट पूरी तरह सामान्य थी. लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विमानन सेक्टर में टैक्स से जुड़ी व्यवस्था की एक जैसी और पारदर्शी जांच ज़रूरी है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सभी एयरलाइंस पर एक समान निगरानी हो, तो इससे सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा और इंडस्ट्री में बराबरी का माहौल बनेगा.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





