दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेत्री सेलिना जेटली की ओर से दायर याचिका पर विदेश मंत्रालय से अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई रिटायर्ड मेजर विक्रांत जेटली से मुलाकात करने और एक अमीरात लॉ फर्म, खालिद अल मारी के पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी साइन करवाने को कहा है.
कोर्ट 17 फरवरी को मामले में अगली सुनवाई करेगा. केंद्र सरकार ने लॉ फर्म को विक्रांत जेटली के केस लड़ने के लिए एक लेटर जारी किया है. कोर्ट ने कहा कि अगर वह फर्म से कानूनी मदद लेने को तैयार नही है, तो वह किसी दूसरी फर्म का नाम सुझाएंगे.
कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से यह भी कहा है कि वह विक्रांत जेटली को उनकी बहन, सेलिना जेटली की अर्जी दे और उनसे पूछा कि क्या वह अपनी बहन से मिलने को तैयार है. इस दौरान कोर्ट ने विक्रांत जेटली की पत्नी चारुल जेटली की दलीलें भी सुनी. उन्होंने कहा कि विक्रांत और उनकी बहन सेलिना के बीच रिश्ते खराब थे. वह विक्रांत जेटली के लिए वकील करने वाली अकेली ऑथोराइज़्ड हैं. कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में एक नोट फाइल करने को कहा है.
भारतीयों की रक्षा सुनिश्चित करने की याचिका
सेलिना जेटली ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत के समक्ष यह मांग रखी है कि विदेश मंत्रालय की यह संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी है कि वह विदेशों में हिरासत में रखे गए भारतीय नागरिकों की रक्षा सुनिश्चित करें. उन्होंने दायर याचिका में यह भी मांग की गई है कि विक्रांत जेटली को तत्काल प्रभावी कानूनी सहायता मुहैया कराई जाए.
एमईए द्वारा विधिक खर्चो के लिए आर्थिक सहायता या सहयोग दिया जाए. सेलिना जेटली को अपने भाई से सीधा और वास्तविक समय में संवाद करने की सुविधा दी जाए. जेटली ने दायर याचिका में यह भी कहा है कि चिकित्सकीय उपचार और मानवीय देखभाल के लिए त्वरित राजनयिक कदम उठाए जाएं.
भारतीय दूतावास द्वारा नियमित कांसुलर निगरानी और पारिवारिक अपडेट सुनिश्चित किए जाए. यूएई अधिकारियों के.साथ समन्वय कर अंतरराष्ट्रीय कानून और वियना कन्वेंशन ऑफ कांसुलर रिलेशंस के तहत उनके अधिकारों की रक्षा की जाए.
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-भारत एक्सप्रेस
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