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सावधान! पालतू कुत्ते का ‘प्यार’ पड़ा भारी: मामूली सा चाटना बना जानलेवा, महिला को गंवाने पड़े अपने दोनों हाथ और पैर

एक मामूली डॉग लिक कैसे जानलेवा हो सकता है? यूके में रहने वाली भारतीय मूल की मनजीत संघा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. कुत्ते की लार में मौजूद बैक्टीरिया ने उनके शरीर में ऐसा संक्रमण फैलाया कि उन्हें 6 बार कार्डियक अरेस्ट आया और अंततः अपने अंग गंवाने पड़े. यह खबर हर पेट लवर (Pet Lover) के लिए एक बड़ी चेतावनी है.

Manjit Sangha, Sepsis, Dog Lick Infection

Sepsis Infection: हम सभी अपने पालतू कुत्तों को परिवार का हिस्सा मानते हैं. उनके साथ खेलना, उन्हें गले लगाना और बदले में उनका हमें चाटना, यह प्यार जताने का एक बड़ा ही आम तरीका है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके वफादार साथी का जरा सा ‘चाटना’ जानलेवा भी हो सकता है? यूके की रहने वाली 52 वर्षीय मनजीत संघा के साथ जो हुआ, वह किसी डरावने सपने से कम नहीं है.

मामूली खरोंच और पूरी जिंदगी बदल गई

वाकया जुलाई 2025 का है. मनजीत रोज़ की तरह काम से घर लौटी थीं. शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद हल्की थकान या वायरल है. लेकिन अगली सुबह तक उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि वे बेहोश हो गईं. उनके शरीर का तापमान गिर चुका था, हाथ-पैर बर्फ जैसे ठंडे पड़ गए थे और होंठ नीले पड़ने लगे थे. जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों के सामने जो हकीकत आई उसने सबको चौंका दिया.

असल में, मनजीत के पालतू कुत्ते ने उनके शरीर पर मौजूद एक छोटी सी खरोंच को चाट लिया था. कुत्ते की लार में मौजूद ‘कैपनोसाइटोफेगा कैनिमोरसस’ नाम का बैक्टीरिया उनके खून में फैल गया. नतीजा यह हुआ कि उन्हें सेप्सिस हो गया, एक ऐसी स्थिति जहां शरीर का इम्यून सिस्टम इन्फेक्शन से लड़ने के बजाय खुद के ही अंगों को तबाह करने लगता है.

शरीर का भारी नुकसान

मनजीत की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें इलाज के दौरान छह बार कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) आया. डॉक्टरों के पास उनकी जान बचाने का कोई और रास्ता नहीं बचा था, सिवाय इसके कि उनके दोनों हाथ और दोनों पैर (घुटने के नीचे से) काट दिए जाएं. आज मनजीत की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है, और इसकी वजह सिर्फ एक ‘डॉग लिक’ थी.

क्या है यह ‘सेप्सिस’?

सेप्सिस कोई साधारण बीमारी नहीं है, बल्कि इन्फेक्शन के प्रति शरीर का एक ‘ओवर-रिएक्शन’ है. जब यह बिगड़ता है, तो पूरे शरीर में सूजन आ जाती है और अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाती है. इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं, लेकिन यह मिनटों में मल्टी-ऑर्गन फेल्योर का कारण बन सकता है.

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इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज

अगर आपको या आपके किसी करीबी को पालतू जानवर के संपर्क में आने के बाद नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास भागें:

तेज बुखार के साथ शरीर का अचानक ठंडा पड़ जाना.

सांस फूलना या दिल की धड़कन का बहुत तेज होना.

पेशाब कम आना और बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना.

त्वचा पर अजीब से लाल या नीले निशान पड़ना.

सावधानी ही बचाव है

इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप अपने पालतू जानवरों से दूर हो जाएं, लेकिन कुछ बुनियादी बातें याद रखना जरूरी है:

घाव को बचाएं: अगर आपके शरीर पर कोई कट, खरोंच या छोटा सा भी घाव है, तो उसे बैंड-एड से ढंककर रखें और कुत्ते को वहां न चाटने दें.

सफाई सर्वोपरि: पालतू जानवर के साथ खेलने के बाद हाथ साबुन से जरूर धोएं.

तुरंत इलाज: अगर पालतू जानवर के चाटने या हल्के से काटने के बाद बुखार महसूस हो, तो उसे मामूली समझकर घर पर न बैठें.

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-भारत एक्सप्रेस



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