दिल्ली के राऊज एवेन्यु कोर्ट से जेपी इंफ्राटेक के पूर्व सीएमडी मनोज गौर सहित अन्य को भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी राहत मिल गई है. निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोप में जेल में बंद मनोज गौर, समीर गौर और सुनील शर्मा को को ने नियमित जमानत दे दिया है. कोर्ट ने एक-एक लाख रुपए की निजी मुचलके पर जमानत दिया है. हालांकि भले ही सीबीआई के मामले में मनोज गौर को जमानत मिल गई हो, लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल से बाहर नही आएंगे.
ईडी जांच में पता चला है कि जेएएल और जेआईएल की ओर से घर खरीदारों से एकत्र किए गए लगभग 14,599 करोड़ रुपए में से बड़ी राशि गैर निर्माण उद्देश्यों के लिए डायवर्ट की गई थी. जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के घर खरीदारों की ओर से कई शिकायतें दर्ज कराई थी.
घर खरीदारों की शिकायत पर शुरू हुई ईडी जांच
शिकायतों में कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया गया था. इन पर कार्रवाई करते हुए कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मुकदमा दर्ज किया था. इसी केस के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की थी.
ईडी के मामले में दायर जमानत याचिका को पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने कहा था कि आरोपी बेहद गंभीर हैं और इसमें हजारों करोड़ रुपए व बड़ी संख्या में निर्दोष घर खरीदार शामिल हैं. अदालत ने कहा था कि आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए मनोज गौर को जमानत नही दी जा सकती है.
जेपी इंफ्राटेक के प्रमोटर्स पर आपराधिक साजिश का आरोप
ईडी का दावा है कि कंपनी और उससे जुड़ी फर्मों ने करीब 14599 करोड़ रुपए के फंड का गलत इस्तेमाल किया. ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के इस केस की जांच शुरू की थी. मई 2025 में ईडी ने दिल्ली नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई समेत करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी की थी.
मनोज गौड़ को 13 नवंबर 2025 को वर्ष 2018 के एक मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था.
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