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योगी आदित्यनाथ की मां पर टिप्पणी से भड़का आक्रोश: लखनऊ के अटल चौराहे पर मौलाना अब्दुल्ला सलीम का फूंका पुतला, 4 दिन में FIR का अल्टीमेटम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माताजी पर मौलाना अब्दुल्ला सलीम की कथित टिप्पणी ने लखनऊ में सियासी बवाल खड़ा कर दिया है. अटल चौराहे पर जुटे युवाओं ने पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए मौलाना को जेल भेजने की मांग की है.

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Lucknow Protest: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का हजरतगंज इलाका आज दोपहर उस समय सियासी तपिश और युवाओं के आक्रोश का केंद्र बन गया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए. मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माताजी पर की गई एक कथित अपमानजनक टिप्पणी से जुड़ा है, जिसने पूरे शहर के माहौल को गरमा दिया है. इस विवाद की जड़ में हैं मौलाना अब्दुल्ला सलीम, जिनके बयानों ने युवाओं के एक बड़े वर्ग को नाराज कर दिया है.

अटल चौराहे पर मौलाना के खिलाफ फूटा गुस्सा

लखनऊ के सबसे व्यस्त और चर्चित हजरतगंज स्थित अटल चौराहे पर आज नजारा कुछ अलग ही था. आम तौर पर ट्रैफिक से गुलजार रहने वाले इस चौराहे पर युवाओं की भारी भीड़ जमा हुई और उन्होंने मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन किसी की मां को लेकर इस तरह की टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने मौलाना का पुतला फूंका और अपना विरोध दर्ज कराया. गुस्सा इतना ज्यादा था कि पुलिस को व्यवस्था बनाए रखने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी.

चार दिन का अल्टीमेटम: “FIR नहीं तो बड़ा आंदोलन”

प्रदर्शनकारी युवाओं ने केवल नारेबाजी ही नहीं की, बल्कि पुलिस प्रशासन के सामने अपनी कड़ी मांगें भी रखीं. उनकी पहली और सबसे प्रमुख मांग यह है कि मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ तुरंत सख्त धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए.

युवाओं ने प्रशासन को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि उनके पास केवल 4 दिन का समय है. यदि इन चार दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज कर मौलाना को गिरफ्तार नहीं किया जाता और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तो लखनऊ की सड़कों पर इससे भी बड़ा आंदोलन शुरू होगा.

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सियासत और संवेदनाओं का टकराव

मुख्यमंत्री की मां पर की गई टिप्पणी ने न केवल समर्थकों को बल्कि आम जनता को भी हैरान कर दिया है. प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के परिवार को विवादों में घसीटना गलत परंपरा है. युवाओं का तर्क है कि अगर कानून समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो ऐसे बयानबाज तत्वों के हौसले और बढ़ेंगे. फिलहाल, पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने की कोशिश की है, लेकिन अटल चौराहे पर हुई इस घटना ने लखनऊ के सियासी पारे को हाई कर दिया है. अब सबकी नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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