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तिरुपति लड्डू विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, भ्रामक पोस्टरों पर एक्शन वाली याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति बालाजी लड्डू विवाद में गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया.

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सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति बालाजी लड्डू विवाद मामले में गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है.

दायर याचिका में उन लोगों या संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिन पर आरोप है कि वे पोस्टरों या सार्वजनिक बयानों के जरिए तिरुपति बालाजी लड्डू विवाद के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 4 अक्टूबर 2024को तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी इस्तेमाल होने के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यों वाली एक स्वतंत्र एसआईटी का गठन किया था. ताकि लोगों की भावनाओं को शांत किया जा सकें.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि अदालत को राजनीतिक आखंडे के तौर पर इस्तेमाल नही किया जा सकता है. इससे पहले दायर याचिका में स्वामी ने कहा था कि आस्था से खिलवाड़ करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने यह भी मांग की थी कि आंध्र प्रदेश सरकार को लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दे. साथ ही उन्होंने एक विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट की भी मांग की थी.

जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

राज्य सरकार ने गुजरात की एक प्रयोगशाला की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया था कि लड्डुओं में इस्तेमाल किए गए घी में बीफ, फीस ऑयल और चर्बी (सुअर की चर्बी) के अंश थे. इससे पहले हिंदू सेना के मुखिया सुरजीत यादव ने याचिका में कहा था कि तिरुपति लड्डू में चर्बी और मछली के तेल के बात सामने आने से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को झटका लगा था. याचिका में कहा गया था कि हिंदू भावनाओं को जिन लोगों ने ठेस पहुचाई है, उन पर जांच के बाद कड़ी कार्रवाई हो.

सुरजीत यादव ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि यह याचिका आम लोगों के हित मे दायर की गई है, जो वित्तीय और कानूनी रूप से पूरी तरह लैस न होने के कारण स्वयं न्यायालय तक नही पहुच सकते है और इस प्रकार वे जनहित याचिका का सहारा लेने की स्थिति में नही है.

वही तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के पूर्व अध्यक्ष और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सांसद वाईवी सुब्बा रेड्डी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर इन आरोपों की जांच कराए जाने की मांग की थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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