सदगुरू जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत मिल गई है. कोर्ट ने जग्गी वासुदेव फाउंडेशन के खिलाफ नक्खीरन नाम के एक तमिल मीडिया आउटलेट द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंड को हटाने का आदेश दिया है. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने ईशा फाउंडेशन द्वारा फाइल की गई अंतरिम राहत की अर्जी को मंजूर कर लिया है.
याचिका में वीडियो हटाने की मांग
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में जग्गी वासुदेव ने वीडियो हटाने की मांग की है और साथ ही 3 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है. फाउंडेशन ने गूगल को इस मामले में पार्टी बनाया है. क्योंकि वीडियो और रिपोर्ट गूगल और यूट्यूब पर उपलब्ध है.
नक्खीरन ने अपने संपादक नक्खीरन गोपाल के साथ किसी वीडियो जारी किए थे, जिसमें वे ईशा फाउंडेशन में बच्चों के साथ.दुर्व्यवहार के आरोपो पर चर्चा कर रहे थे.
नाम का बिना अनुमति के किया गया इस्तेमाल
सदगुरू जग्गी वासुदेव ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर फर्जी वेबसाइटों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से उनके व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ सुरक्षा की मांग की है.
वहीं, पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि सदुरु के नाम का बिना अनुमति के उपयोग कर कई उत्पाद बेचे जा रहे हैं. मामले की संक्षिप्त सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा था कि वो इस मामले में अंतरिम आदेश पारित करेगी.
सद्गुरु के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा
मामले की सुनवाई के दौरान सद्गुरु के वकील ने कहा था कि भारत में प्रसिद्घ और सम्मानित व्यक्ति और घरेलू नाम है. उन्होंने तर्क दिया था कि ये एक ऐसा मामला है. जहां वादी के नाम का पूरी तरह से व्यावसायिक रूप से दुरूपयोग किया जा रहा है.
सद्गुरु के वकील ने कहा था कि सद्गुरु के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए एक डायनामिक इंजक्शन जारी किया जाए.यह आदेश भविष्य में होने वाले इस तरह की गलतियों पर लगाम लग पाएगा.
इससे पहले भी ईशा फाउंडेशन की ओर से एक याचिका दायर की गई थी. इससे पहले सद्गुरु को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिल चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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