तारीख पर तारीख लेने की परंपरा पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक नया सर्कुलर जारी किया है. कोर्ट ने कहा है कि बार-बार सुनवाई टालने की परंपरा को अब खत्म किया जाएगा. अब सुनवाई तभी टाली जाएगी, जब कोर्ट को लगे कि सुनवाई टालना जरूरी है.
विशेष परिस्थितियों में टाली जाएगी सुनवाई
18 मार्च को जारी सर्कुलर में कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही सुनवाई को टाला जाएगा. सीजेआई ने नवंबर 2025 और दिसंबर 2025 में जारी सर्कुलर को रद्द कर नया सर्कुलर जारी किया है. इसके तहत अलग-अलग मामलों के लिए अलग-अलग नियम तय किए गए है.
नए नियम के तहत अब वकील या पक्षकार सुनवाई टालने के लिए आवेदन.दे सकते है, लेकिन इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है. सुनवाई टालने की मांग करने से पहले उसकी प्रति विपक्षी पक्ष को देना जरूरी है और इसका सबूत भी देना होगा.
यह आवेदन सुनवाई के एक दिन पहले सुबह 11 बजे तक जमा करना होगा. इतना ही नही, दूसरी पार्टी को भी इस पर आपत्ति जताने का मौका दिया जाएगा. वह दोपहर 12 बजे तक ईमेल के जरिये अपनी आपत्ति को दर्ज करा सकते हैं.
बिना वजह नहीं टाली जाएगी सुनवाई
जारी सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि सुनवाई टालने की मांग करने वाले को इसके लिए ठोस कारण बताना होगा. साथ ही यह भी बताना होगा कि पहले कितनी बार तारीख ली जा चुकी है. बिना वजह सुनवाई टालना संभव नहीं होगा. सुनवाई तभी टाली जाएगी, जब परिवार के किसी सदस्य की मौत, गंभीर बीमारी या कोई और ठोस और वास्तविक कारण, जो कोर्ट को संतोषजनक लगें.
देरी को रोकने के लिए कोर्ट ने कुछ और कड़ें प्रावधान भी किए. नए मामलों में स्थगन का आवेदन केवल एक बार ही दिया जा सकेगा. साथ ही लगातार दो बार स्थगन नहीं मिलेगा, जब तक मामला अदालत के सामने पेश न किया जाए.
-भारत एक्सप्रेस
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