Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

कोयला घोटाला: पूर्व सांसद विजय दर्डा और पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता हुए बरी; राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कहा- ‘सबूतों का अभाव’

महाराष्ट्र के बांदर कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में दिल्ली की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पूर्व सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र दर्डा और पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता को धोखाधड़ी और साजिश के सभी आरोपों से बरी कर दिया है.

coal-scam-vijay-darda-hc-gupta-acquitted-rouse-avenue-court-judgment
Edited by Vaibhav Gupta

महाराष्ट्र बांदर कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट की लिखित फैसले की कॉपी आ गई है. कोर्ट ने पूर्व सांसद विजय दर्डा, उनके बेटे देवेंद्र दर्डा, पूर्व कोयला सचिव एच. सी. गुप्ता को धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश या कदाचार के आरोपों से बरी कर दिया है.

क्यों किया आरोपों से बरी?

सीबीआई की विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा की अदालत ने मनोज कुमार जयसवाल एवं मैसर्स एएमआर आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड को भी बरी कर दिया है. कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), धारा 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 9 तथा 13(1)(d) के तहत सभी आरोपों से सभी आरोपियों को बरी कर दिया है.

कोर्ट ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नही मिले है. कोर्ट ने कहा कि आवेदन से जुड़ी ज्यादातर जानकारी पहले से ही संबंधित अधिकारियों के पास मौजूद थी और किसी भी गवाह ने यह पुष्टि नहीं की कि किसी तरह का दबाव, लालच या धोखा दिया गया था.

अदालत ने अपने फैसले में ये भी कहा है कि कथित 24.6 करोड़ रुपये के लेन-देन के आरोप साबित नहीं हो पाया. अदालत को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे ये साबित हो कि इन पैसों का कोयला ब्लॉक आवंटन या विजय दर्डा द्वारा लिखे गए पत्रों से कोई संबंध था. कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है.

क्या है पूरा मामला?

ये मामला महाराष्ट्र के बांदर कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था. सीबीआई ने 2012 में एफआईआर दर्ज की थी और 2014 में चार्जशीट दाखिल किया था. अभियोजन पक्ष के मुताबिक कंपनी ने कोयला मंत्रालय को आवेदन में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए, अपनी वित्तीय स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर बताया और लोकमत ग्रुप तथा आईएलएंडएफएस से जुड़ाव का झूठा दावा किया.

साथ ही स्क्रीनिंग कमिटी के सामने गुमराह करने वाली जानकारी पेश की गई. दर्डा परिवार पर आरोप था कि उन्होंने आवंटन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सिफारिश की. जबकि गुप्ता पर आरोप था कि उन्होंने कंपनी द्वारा पूरी जानकारी न देने की अनदेखी की. जो उच्चस्तरीय पैनल और प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के अनुसार हुई थी.

ये भी पढ़ें: ‘कानूनी सहायता दान नहीं’, अनुच्छेद 39 A का हवाला देते हुए सीजेआई सूर्यकांत

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital