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‘कानूनी सहायता दान नहीं’, अनुच्छेद 39 A का हवाला देते हुए सीजेआई सूर्यकांत

लेह और कारगिल की दुर्गम वादियों में जवानों के बीच पहुंचे मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक बड़ा और भावुक संदेश दिया है. CJI ने साफ कहा कि सीमा पर तैनात जवान को घर के कानूनी झगड़ों के लिए दूसरी लड़ाई लड़ने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए.

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Edited by Vaibhav Gupta

लेह यात्रा के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने जवानों से बातचीत के दौरान कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात जवान सिर्फ दुश्मनों से ही नही, बल्कि कई बार अपने निजी और कानूनी संघर्षों से भी जूझते है.

कानूनी सहायता दान नहीं: CJI

सीजेआई सूर्यकांत ने अनुच्छेद 39 A का हवाला देते हुए कहा कि कानूनी सहायता दान नहीं है, ये गणतंत्र द्वारा अपने वादों के प्रति निष्ठा का कार्य है. किसी को राष्ट्र को अपने सैनिकों को एक साथ दो लड़ाईयां लड़ने की स्थिति में नहीं डालना चाहिए. उन्होंने कहा एक सीमा पर और दूसरी अपने देश में अपने कानूनी अधिकारों को लिए.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि देश अपने सैनिकों को दो मोर्चो पर लड़ने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है. एक सीमा पर और दूसरा अपने अधिकारों के लिए घर पर  उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच हर सैनिक का अधिकार है और इसके लिए व्यवस्था को उनके पास पहुंचना होगा.

उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत “वीर परिवार सहायता योजना” शुरू की गई, जिसके जरिये सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता दी जा रही है. अब तक हजारों लोगों को इसका फायदा मिल चुका है. देश में सैकड़ो लीगल क्लीनिक स्थापित किए गए हैं.

सैनिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा एक कर्तव्य

सीजेआई ने ये भी कहा कि संविधान में न्याय, समानता और गरिमा की जो बात कही गई है, वो तभी संभव है जब देश सुरक्षित हो और ये सुरक्षा हमारे जवान सुनिश्चित करते है. इसलिए देश की संस्थाओं का कर्तव्य है कि वे सैनिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करें.
न्यायाधीश ने आगे कहा कि जिस तरह से सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी तरह न्यायपालिका उनकी हर संभव मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है.

CJI सूर्यकांत ने रविवार को कारगिल में अत्याधुनिक जिला अदालत परिसर का उद्घाटन करते हुए कहा थ कि न्याय के लिए भौगोलिक दूरियां बाधा नहीं है. उन्होंने इसे देश के सबसे कठिन इलाकों में कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है.

देश हित में निभाई अहम भूमिका

इससे पहले सीजेआई ने कहा था कि लद्दाख के लोगों ने देश की हित में हमेशा अहम भूमिका निभाई है. उनपर देश को गर्व है. उन्होंने कहा था किउनका प्रयास है कि यहां पर डियूटी दे रहे सैनिकों व अन्य लोगों को सस्ती, सुलभ और कम समय में न्याय मिले. लद्दाखवासी भारत का गौरव है और भारत की न्यायपालिका व हर नागरिक भावुकता के साथ लद्दाख से जुड़ा है.

उन्होंने कहा था कि यहां के लोग हमेशा से ही भारत के संविधान, न्यायपालिका व नागरिक प्रशासन के प्रति जो विश्वास रहा है, उनमें एक और कड़ी जुड़ गई है. देश के इतिहास में पहली बार लद्दाख गए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भारतीय न्याय पालिका के लिए गर्व है कि वो यहां पर भारत का प्रतिनिधित्व करने आए है.

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-भारत एक्सप्रेस



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