Nalanda temple stampede 2026: बिहार के नालंदा जिले में स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में मंगलवार सुबह एक भीषण हादसा हो गया. शीतलाष्टमी और ‘मंगला मेला’ के विशेष अवसर पर माता के दर्शन के लिए उमड़ी हजारों की भीड़ के बीच अचानक मची अफरा-तफरी में 8 महिलाओं समेत कुल 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर में पैर रखने तक की जगह नहीं थी और इसी बीच उमस व भीड़ के कारण कुछ महिलाएं बेहोश होकर गिर गईं.
इसके बाद मची भगदड़ में लोग एक-दूसरे को कुचलते हुए भागने लगे, जिससे यह भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई. हादसे में घायल हुए 7 अन्य श्रद्धालुओं को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है.
मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ने साझा किया दुख
इस त्रासदी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरा शोक व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि वे इस घटना से अत्यंत मर्माहत हैं. मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन विभाग से 4 लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये (कुल 6 लाख रुपये) प्रत्येक मृतक के परिजनों को देने का निर्देश दिया है.
वहीं राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस हादसे को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की. उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों के समुचित इलाज के लिए प्रशासन को कड़े निर्देश दिए गए हैं.
मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिले के वरिष्ठ अधिकारी और भारी पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंच गया. मंदिर परिसर को खाली कराकर राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया गया. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मेले के कारण भीड़ की संख्या उम्मीद से कहीं अधिक थी जिससे प्रबंधन व्यवस्था चरमरा गई. स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के मानकों में कहाँ चूक हुई. फिलहाल मंदिर के आसपास के क्षेत्र में तनाव और शोक का माहौल है और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है.
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हादसे के बाद क्या है ताजा स्थिति?
अस्पताल में भर्ती घायलों की स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है. डॉक्टरों के अनुसार, भगदड़ के कारण कई लोगों को अंदरूनी चोटें आई हैं और कुछ अभी भी गहरे सदमे में हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि घायलों के इलाज का सारा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.
वहीं इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा ऑडिट की अनिवार्यता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते भीड़ को नियंत्रित किया जाता, तो आज 9 परिवारों के चिराग नहीं बुझते.
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-भारत एक्सप्रेस
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