आज के दौर में जब हम शिक्षा की बात करते हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान अच्छी नौकरी, ऊंचे पैकेज और करियर की भागदौड़ पर जाकर टिक जाता है. लेकिन क्या शिक्षा का मकसद सिर्फ पेट पालना है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देश के युवाओं और छात्रों को याद दिलाया है कि असली शिक्षा वो है जो इंसान को केवल ‘पढ़ा-लिखा’ नहीं, बल्कि ‘संस्कृत’ और ‘श्रेष्ठ’ बनाए. प्रधानमंत्री का मानना है कि भारत की असली ताकत उसकी युवाशक्ति है, और यह शक्ति तभी फलीभूत होगी जब ज्ञान के साथ-साथ हमारे पास संस्कारों की पूंजी भी होगी.
शिक्षा एक अनमोल पूंजी: PM Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा की महत्ता को एक प्राचीन संस्कृत श्लोक के जरिए पिरोते हुए अपने संदेश में लिखा, ‘शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का सशक्त माध्यम भी है. ये वो अनमोल पूंजी है, जिसके जरिए आज हमारी युवाशक्ति हर क्षेत्र में नए-नए कीर्तिमान बनाकर देश का नाम रोशन कर रही है. पीएम मोदी ने अपने पोस्ट को एक संस्कॉत श्लोक के साथ खत्म किया.
शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का सशक्त माध्यम भी है। यह वो अनमोल पूंजी है, जिसके जरिए आज हमारी युवाशक्ति हर क्षेत्र में नए-नए कीर्तिमान बनाकर देश का नाम रोशन कर रही है।
श्रियः प्रदुग्धे विपदो रुणद्धि
यशांसि सूते मलिनं प्रमार्ष्टि।संस्कारशौचेन… pic.twitter.com/W6rlpcbQ2n
— Narendra Modi (@narendramodi) April 3, 2026
उन्होंने लिखा-
“श्रियः प्रदुग्धे विपदो रुणद्धि
यशांसि सूते मलिनं प्रमार्ष्टि।
संस्कारशौचेन परं पुनीते
शुद्धा हि बुद्धिः किल कामधेनुः॥”
क्या है इस संस्कृत श्लोक का अर्थ?
प्रधानमंत्री ने जिस श्लोक को साझा किया है, वो शिक्षा की शक्ति का अद्भुत वर्णन करता है. इसका भावार्थ है कि- “सच्ची विद्या वो है जो वैभव (लक्ष्मी) प्रदान करती है, विपत्तियों को दूर करती है, यश फैलाती है और मन की गंदगी को धो डालती है. इतना ही नहीं, ये संस्कारों की शुद्धि के जरिए मनुष्य के व्यक्तित्व को भी पवित्र कर देती है.”
सरल शब्दों में कहें तो, शिक्षा सिर्फ जानकारी इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि ये चरित्र निर्माण की एक प्रक्रिया है. अगर एक शिक्षित व्यक्ति के पास संस्कार नहीं हैं, तो उसकी विद्या समाज के काम नहीं आ सकती.
युवाशक्ति और ‘विकसित भारत’ का सपना
नई शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि किताबी ज्ञान के बोझ को कम किया जाए और ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ व ‘वैल्यू बेस्ड एजुकेशन’ पर जोर दिया जाए. पैसा कमाना जरूरी है, लेकिन वह शिक्षा का एकमात्र लक्ष्य नहीं होना चाहिए.
आज हमारे युवा स्टार्टअप्स, खेल, विज्ञान और तकनीक में जो झंडे गाड़ रहे हैं, उसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत तो है ही, लेकिन साथ ही वह ‘भारतीय संस्कार’ भी हैं जो उन्हें वैश्विक मंच पर सबसे अलग खड़ा करते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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