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सीजेआई सूर्यकांत की वकीलों को सख्त चेतावनी; AI पर निर्भरता से बिगड़ सकता है न्याय का संतुलन, दलीलें खुद तैयार करने के दिए निर्देश!

सीजेआई सूर्यकांत ने वकीलों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे की नैतिक जिम्मेदारियों को AI या किसी बाहरी माध्यम पर पूरी तरह निर्भर नहीं किया जा सकता. यह टिप्पणी एओआर (Advocate-on-Record) वकीलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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Edited by Shubhra Rai
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एओआर वकीलों की जिम्मेदारी अदालत और पक्षकारों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होती है, जिसे अत्यधिक सतर्कता और स्वतंत्र सोच के साथ निभाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि AI टूल्स या बाहरी एजेंसियों पर अंधाधुंध निर्भरता कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है. सीजेआई ने स्पष्ट किया कि दलीलें स्वयं तैयार की जाएं, तथ्यों का स्वतंत्र सत्यापन हो और न्यायिक निर्णय हमेशा मानवीय विवेक पर आधारित होना चाहिए, न कि मशीनों पर.

सीजेआई का वकीलों को चेतावनी

सीजेआई सूर्यकांत ने एआई को लेकर वकीलों को चेतावनी दी है. सीजेआई ने यह चेतावनी एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के बैच को संदेश देते हुए कहा कि कानूनी पेशे के नैतिक दायित्वों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या किसी बाहरी पक्ष को आउटसोर्स नहीं किया जा सकता है.

संविधान के अनुच्छेद 142के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाए गए नियमों के मुताबिक केवल उन्हीं अधिवक्ताओं को सुप्रीम कोर्ट में किसी पक्ष की ओर से पैरवी करने का अधिकार है, जिन्हें एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के रूप में नामित किया गया है.

सतर्कता और परिश्रम की आवश्यकता

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एओआर बनना एक वकील के कैरियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं. उन्होंने इस बात पर जोड़ दिया कि वे वादियों और सुप्रीम कोर्ट के बीच जिम्मेदारी की मुख्य कड़ी हैं. जिसके लिए अत्यधिक सतर्कता और परिश्रम की आवश्यकता होती है.

कानूनी शोध और मसौदा तैयार करने के लिए एआई उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता और वरिष्ठ वकीलों की ओर से जूनियर वकीलों या बाहरी एजेंसियों द्वारा कागजी कार्रवाई संभालने की व्यापक संस्कृति के मद्देनजर सीजेआई सूर्यकांत की यह टिप्पणी काफी अहम मानी जा रही है.

दोहरे खतरों के प्रति आगाह किया

सीजेआई सूर्यकांत ने आदेश दिया है कि दलीलें स्वयं तैयार किया जाए, तथ्यों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जाए और कानूनी आधारों की गहन जांच की जाए. उन्होंने एआई द्वारा तैयार किए गए मसौदों और अन्य वकीलों द्वारा दिए गए निर्देशों पर अंधाधुंध निर्भरता के दोहरे खतरों के प्रति आगाह किया है.

इससे पहले एक कार्यक्रम के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि एआई कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह मानव जज की जगह नहीं ले सकता. क्योंकि उसमें संवेदना, करुणा और जवाबदेही जैसे जरूरी मानवीय गुण नहीं होते.

आकंड़ो तक सीमित नहीं किया जा सकता

उन्होंने यह भी कहा था कि न्याय देना केवल गणना का कार्य नहीं बल्कि अंतर्रात्मा का निर्यण होता है. सीजेआई ने कहा था कि कानून सिर्फ नियमों का तंत्र नहीं है, बल्कि निर्णय का तंत्र है और सच्चा निणर्य गणना नहीं बल्कि विवेक का विषय है. सीजेआई ने कहा था कि अदालतें प्रत्येक दिन ऐसा फैसला देती है जो किसी व्यक्ति की आजादी, गरिमा और भविष्य से जुड़े होते हैं.

इन्हें आकंड़ो तक सीमित नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा था कि ऐसा तंत्र स्वीकार्य नहीं हो सकता, जहां किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ा अंतिम निर्णय किसी मशीन के हाथ में हो.

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-भारत एक्सप्रेस



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