Traditional Indian fridge: अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के दिन घड़े का पानी पीना एक पुरानी परंपरा है. माना जाता है कि यह सेहत के लिए अच्छा होता है और शरीर को ठंडक देता है. मिट्टी का घड़ा पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है, इसलिए इसे गर्मियों में बहुत फायदेमंद माना जाता है. चलिए जानते है:
क्या है पूरानी मान्यताएं?
पुरानी कहानियों के अनुसार, इसी दिन पांडवों को अक्षय पात्र मिला था, जिसमें रखा भोजन कभी खत्म नहीं होता था. एक और मान्यता यह भी है कि समुद्र मंथन के समय निकले ज़हर को भगवान शिव ने अपने गले में धारण किया था, और उस ज़हर के असर को कम करने के लिए उन्हें घड़े के पानी से ठंडक दी गई थी. इसलिए इस दिन घड़े के पानी का महत्व माना जाता है.
अब अगर आसान भाषा में समझें, तो गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक की जरूरत होती है. हमारे शरीर में पाँच तत्व होते हैं- जल, वायु, अग्नि, आकाश और पृथ्वी. गर्मियों में शरीर की ‘अग्नि’ यानी गर्मी बढ़ जाती है, इसलिए ठंडा और संतुलित पानी पीना जरूरी होता है.
त्योहारों के साथ ऐसी आदतें जोड़ते थे
मिट्टी का घड़ा पानी को प्राकृतिक तरीके से ठंडा करता है. इसमें रखा पानी न तो बहुत ठंडा होता है और न ही नुकसान करता है. इसे पीने से प्यास अच्छी तरह बुझती है और शरीर भी स्वस्थ रहता है. इसके उलट, धातु या प्लास्टिक के बर्तन में रखा पानी जल्दी गर्म हो जाता है, जिससे राहत नहीं मिलती.
इसीलिए हमारे पुराने लोग त्योहारों के साथ ऐसी आदतें जोड़ते थे जिनसे सेहत भी अच्छी रहे (health benefits of clay pot water). घड़े का पानी पीना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक आसान और फायदेमंद तरीका है खुद को गर्मी में स्वस्थ रखने का. तो अगर आप अभी तक फ्रिज का पानी पी रहे हैं, तो इस गर्मी में एक मिट्टी का घड़ा जरूर ट्राई करें.
-भारत एक्सप्रेस
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