दिल्ली शराब नीति से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में दायर सीबीआई की अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट 4 मई को सुनवाई करेगा. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि वही इस मामले में सुनवाई करेंगी. कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से पूरा रिकॉर्ड तलब किया है. साथ ही कोर्ट ने मामले में 2 मई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट 4 मई को इस मामले में सुनवाई करेगा.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि रिकॉर्ड न मिलने के कारण अदालत ने सुनवाई को टाल दिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और डीपी सिंह मौजूद थे. वही एक अन्य पक्षकार की ओर से वकील फारुख पेश हुए जिन्होंने स्टे हटाने से संबंधित दायर अर्जी की जानकारी दी. बता दें कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिख कर सुनवाई में पेश नही होने की बात कही है. पिछले दिनों हाई कोर्ट ने केजरीवाल सहित अन्य की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केस से खुद को अलग होने की मांग की गई थी.
हालांकि केजरीवाल और सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा है कि सुनवाई के दौरान उनके तरफ से कोई वकील पेश नही होगा. क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि उनको इस कोर्ट ने इंसाफ नही मिलेगा. यह मामला दिल्ली शराब नीति से जुड़ा है. जिस मामले में सीबीआई और ईडी दोनों ने हाई कोर्ट का रुख किया है. जिसपर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा सुनवाई कर रही है.
मनीष सिसोदिया का कड़ा रुख
पिछले दिनों कोर्ट ने केजरीवाल के उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें याचिका में कहा गया था कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से खुद को अलग होने की मांग की गई थी. सिसोदिया ने अपने पत्र में कहा कि मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नही होगा. आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी के हाथों में है. ऐसी स्थिति में मुझे आपसे न्याय की कोई उम्मीद नही है. मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.
इससे पहले केजरीवाल ने पत्र लिखा था कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा जी से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है, इसलिए मैंने गांधी की तरह सत्याग्रह पर चलने का फैसला लिया है. अब वह खुद या वकील के जरिए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही थी.
यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का आदेश: फांसी की सजा से पहले अपराध और अपराधी के हालातों की जांच अनिवार्य
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



