Ambedkarnagar Crime News: अंबेडकरनगर/गिरजेश प्रताप सिंह: उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में एक दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम देने वाले हत्यारे का जब अंत हुआ, तो जो तस्वीर सामने आई उसने पूरे समाज को एक कड़ा संदेश दिया है. एक मां और उसके चार मासूम बच्चों की निर्ममता से हत्या करने वाले आरोपी ‘आमिर’ का अंत पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में हुआ. इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर रखा था, लेकिन असली कहानी उसकी मौत के बाद शुरू हुई, जब उसके अपने ही परिवार ने उसका शव लेने से साफ इनकार कर दिया.
‘वह अपराधी था, हमारा उससे कोई नाता नहीं’
अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के मुरादाबाद इलाके में इस जघन्य वारदात को अंजाम देने वाले आमिर का पोस्टमार्टम होने के बाद, पुलिस उसका शव लेकर परिजनों को सौंपने पहुंची. लेकिन परिवार ने दो टूक शब्दों में शव लेने से मना कर दिया. परिजनों ने सख्त लहजे में कहा कि-
‘वह एक अपराधी था, उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है. उसने जो किया, वह पूरी तरह से इंसानियत के खिलाफ है.” अपनी इसी नाराजगी के चलते परिवार ने आमिर के अंतिम संस्कार से पूरी तरह किनारा कर लिया.’
इमाम का ‘फातिहा’ पढ़ने से किया इनकार
कातिल आमिर का यह बहिष्कार सिर्फ उसके परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे समाज ने उसे सिरे से खारिज कर दिया. मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब इलाके के पेश इमाम (ताज मोहम्मद) ने भी आरोपी के लिए ‘फातिहा’ (नमाज-ए-जनाजा) पढ़ने से साफ मना कर दिया. इमाम के इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि समाज और धर्म में ऐसे जघन्य अपराधों के लिए कोई माफी या जगह नहीं है.
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रात के अंधेरे में पुलिस ने ही किया दफन
जब परिवार, समाज और धर्म के जानकारों ने आमिर से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया, तो आखिरकार कानून के रखवालों को ही यह जिम्मेदारी उठानी पड़ी. देर शाम पुलिस ने ही आरोपी आमिर के शव को दफनाया. एक तरफ जहां आमिर के खौफनाक अपराध ने इंसानियत को शर्मसार किया था, वहीं दूसरी तरफ मौत के बाद अपनों द्वारा ठुकराए जाने की इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं— क्या ऐसे रूह कंपा देने वाले अपराधों के बाद खून के रिश्ते भी हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं? फिलहाल, अंबेडकरनगर पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच में जुटी हुई है.
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