मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनाई को टालने से इनकार कर दिया है. केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई को टालने की मांग की, जिसपर इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है.
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एसजी मेहता ने सुनवाई टालने की मांग पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस केस की तारीख पहले से तय थी. उन्होंने साफ कहा कि यह मामला किसी भी अन्य मामले से ज्यादा अहम है. दरअसल एसजी मेहता ने कहा कि सबरीमाला से जुड़े मामले में सुनवाई कर रही 9 जजों की बेंच में व्यस्त हैं और चाहते हैं और जब याचिकाकर्ता अपनी दलीलें रखें, तब वे खुद कोर्ट में मौजूद रहें. इसपर जस्टिस दत्ता ने कहा कि अगर पहले बताया गया होता तो सुनवाई को टाल दिया जाता. लेकिन अब सुनवाई टालना अब संभव नही है.
याचिका में चयन समिति के तीसरे सदस्य के बदलाव की मांग
जस्टिस दत्ता ने यह भी कहा कि अखबारों में पढ़ने को मिला है कि 9 जजों की बेंच ने सबरीमाला मामले की सुनवाई पर ही सवाल उठाया है कि शायद इसे सुना ही नही जाना चाहिए था. याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कानून के मुताबिक तीन सदस्यीय समिति में तीसरे सदस्य के चयन में बदलाव किया जाना चाहिए. तीन सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता द्वारा तीसरा सदस्य चुना जाना चाहिए. नए कानून के मुताबिक तीसरा सदस्य केंद्रीय मंत्री होने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं लायी जा सकती. ऐसे में अदालत इस पहलू की समीक्षा करे. वही जया ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा है कि बरनवाल बनाम भारत संघ और अन्य के मामले सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का उल्लंघन है. अनूप बरनवाल मामले में फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा था कि पैनल में प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होने चाहिए.
याचिका में अनुच्छेद 14 के उल्लंघन का लगाया गया आरोप
वही, नए कानून में सीजेआई की जगह कैबिनेट मंत्री को बतौर सदस्य रखा गया है. याचिका में यह भी कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है. 2 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि CEC और EC की नियुक्ति तीन सदस्यीय पैनल की तरफ से की जाएगी. इसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे.
केंद्र सरकार ने 2023 में जो कानून बनाया है उसमें सिलेक्शन कमिटी में चीफ जस्टिस को हराकर उनकी जगह पीएम की ओर से नामित केंद्रीय मंत्री को रखा गया है. इस तरह से सिलेक्शन प्रक्रिया खतरे में होगी और हेरफेर का आदेश है क्योंकि सिलेक्शन प्रक्रिया एग्जेक्युटिव के कंट्रोल में होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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