पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान टीएमसी ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि एसआईआर में नाम हटाए जाने से कुछ विधानसभा क्षेत्रों के चुनावी नतीजों पर बड़ा असर पड़ा है. जिसके बाद कोर्ट ने नई याचिका दायर करने का सुझाव दिया है.
वही मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से मौजूद वकील ने कोर्ट को बताया कि यह चुनाव याचिका ही एक मात्र विकल्प है. आयोग ने स्पष्ट किया कि वह एसआईआर से संबंधित मुद्दों और वोट जोड़ने या हटाने के खिलाफ होने वाली अपीलों के लिए जवाबदेह हो सकता है.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि 31 सीटों में टीएमसी पर बीजेपी की जीत का अंतर एसआईआर में हटाए गए लोगों की संख्या की संख्या से कम था. उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में, नाम हटाए जाने और हार का अंतर एक जैसा था.
वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
टीएमसी के वकील ने कहा एक विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार सिर्फ 863 वोटों के अंतर से हार गया और यहां वोटर लिस्ट से हटाए गए 5432 लोगों की अपील अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित है. जिनकी अपील अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित है, उन्हें इस विधानसभा चुनाव में वोट करने की इजाजत नही दी गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पार्टियों के बीच कुल वोटों के बीच का अंतर 32 लाख था, जबकि इससे ज्यादा अपीलें अभी भी डिलिशन के खिलाफ लंबित है.
इसपर कोर्ट ने उन्हें अर्जी दाखिल करने को कहा है. वही सुनवाई के दौरान मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि जिस रफ्तार से अपीलीय ट्रिब्यूनल में सुनवाई चल रही है. ऐसे में मामलों का निपटारा करने में कम से कम चार साल का समय लग सकता है.
बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा में 293 में से 207 सीटे जीती है, जबकि टीएमसी ने 80 सीटे मिली है. इस विधानसभा चुनाव में 90 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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