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Graham Staines Case: ‘पेरारिवलन को छोड़ा तो मुझे क्यों नहीं?’ ग्राहम स्टेंस के हत्यारे दारा सिंह की सुप्रीम कोर्ट से गुहार

ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के दोषी दारा सिंह की रिहाई की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मामले को 14 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया.

Graham Staines Case: आस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके नाबालिग बेटों की हत्या के दोषी दारा सिंह द्वारा रिहाई की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 14 मई को सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया है 25 मई को भुनेश्वर में बोर्ड की बैठक है. जिसके बाद कोर्ट ने 14 जुलाई की तारीख तय किया है. स्टेटस सेंटेंस रिव्यू बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह मीटिंग बुलाई गई है.

दारा सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि बिना किसी परोल के 25 साल जेल में गुजार चुका है. दारा सिंह ने अपनी याचिका में स्वर्गीय राजीव गांधी के हत्यारे एजी पेरारिवलन की रिहाई के भी हवाला दिया है. पिछली सुनवाई के दौरान मामले दारा सिंह की ओर से पेश वकील विष्णु जैन ने कहा था कि वह 25 साल से ज्यादा वक्त से जेल में बिता चुका है.

दारा सिंह की रिहाई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग

विष्णु जैन ने यह भी कहा कि उड़ीसा राज्य में सजा की माफी का नियम 25 साल है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट उसकी याचिका पर विचार करे. दरअसल ओडिशा में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके नाबालिग बेटों की हत्या का मामले मे उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह ने माफी देकर रिहाई का निर्देश देने की मांग की है. दारा सिंह ने अपनी याचिका में राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई का दिया हवाला देते हुए कहा कि ग्राहम स्टेंस से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी और दो दशक पहले किए अपराध को कबूल करता है और उस पर खेद है.

बता दें कि 1 सितंबर 1999 में दारा सिंह ने एक भीड़ की अगुवाई करते हुए उस गाड़ी को आग के हवाले कर दिया था, जिसमें ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटे सो रहे थे. इस घटना में कुष्ठ रोगियों के लिए एक आश्रम चलाने वाले स्टेंस और उनके दो बेटों की जलकर मौत हो गई थी. इस हत्याकांड को लेकर 2003 में खोरधा कई निचली अदालत ने दारा सिंह को मौत और 12 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

बाद में ओडिसा हाई कोर्ट ने सिंह की मौत की दर्ज को आजीवन कारावास में बदल दिया था.

यह भी पढ़ें: IPAC मामला: 22 मई तक सुनवाई टली, ‘संवैधानिक विफलता’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

-भारत एक्सप्रेस 



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