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दिल्ली दंगा 2020: 700 गवाह, 5 साल की कैद और समानता के आधार पर जमानत की मांग, 22 मई को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगा मामले में आरोपी तस्लीम अहमद और अब्दुल खालिद सैफी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए एएसजी एसवी राजू को दलीलें रखने के लिए समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी.

Supreme Court Final Deadline in Sheena Bora Murder Case

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगा मामले में आरोपी तस्लीम अहमद और अब्दुल खालिद सैफी की ओर से दायर जमानत याचिका पर दलील रखने के लिए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू को समय दे दिया है. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ से एएसजी एस वी राजू ने कहा कि एक या दो दिन का समय चाहिए. मैं इससे अधिक समय नहीं मांगूंगा. वहीं सुनवाई के दौरान तस्लीम अहमद के वकील ने कहा कि मैं एक साथी का साथी हूं. मेरे तीन साथियों को जमानत मिल चुकी है. मैं केवल आपके फैसले पर भरोसा कर रहा हूं. जबकि वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने कहा कि मैं भी आपके रुख पर भरोसा कर रही हूं. कोर्ट ने कहा पहली नजर में हम आपसे सहमत हैं. कोर्ट 22 मई को मामले में अगली सुनवाई करेगा.

‘किसी आरोपी को कितने साल तक जेल में रखा जा सकता है?’

पिछली सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों को पांच साल हो चुके हैं? किसी आरोपी को कितने साल तक जेल में रखा जा सकता है? अदालत ने आरोपी की तरफ से मुकदमे में देरी के आधार पर दलीलें दिए जाने के बाद यह सवाल पूछा था. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया था कि इस मामले में शामिल कई आरोपियों को देरी के आधार पर वर्ष 2021 में जमानत मिल चुकी है, जिनमें सह-आरोपी देवांगना कलिता, आसिफ इकबाल तन्हा और नताशा नरवाल शामिल हैं. उन्होंने कहा था कि तस्लीम अहमद पिछले पांच साल से जेल में बंद है. 24 जून 2020 को उसे गिरफ्तार किया गया था.

700 गवाह और समानता के आधार पर जमानत की मांग

ट्रायल खत्म होने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है. इस मामले में 700 गवाह हैं, लिहाजा जमानत दे दी जाए. उन्होंने कहा था अहमद के मुकदमे अन्य आरोपियों से अलग हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि पिछले साल से अब तक पांच सह-आरोपियों ने आरोप पर दलीलें पूरी की हैं. तस्लीम अहमद, अब्दुल खालिद सैफी, शरजील इमाम, उमर खालिद, ताहिर हुसैन और अन्य के साथ 2020 के दिल्ली हिंसा के मामले की एक बड़ी साजिश में आरोपी हैं.

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इससे पहले उनकी नियमित जमानत याचिका को कड़कड़डूमा कोर्ट ने 22 फरवरी 2024 को खारिज कर दिया था. जिसमें उन्होंने सह-आरोपियों नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा के साथ समानता के आधार पर जमानत मांगी थी. लेकिन कोर्ट ने अहमद की ओर से दी गई सभी दलीलों को दरकिनार करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था.



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