सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनाव की मतगणना पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें.
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील और एससीबीए के अध्यक्ष विकास सिंह ने कोर्ट से मतगणना जारी रखने के आदेश देने की मांग की. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक परिणाम जारी नहीं है, इसे पूरा होने दीजिए. लेकिन कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा मानते हुए आदेश देने से इनकार कर दिया है.
हाई कोर्ट को दैनिक आधार पर सुनवाई का निर्देश
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मतगणना पर रोक लगा दी थी. साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट को दायर याचिकाओं पर दैनिक आधार पर सुनवाई करने का निर्देश दिया था. यह याचिका बीरेंद्र सांगवान सहित अन्य की ओर से दायर की गई है. कोर्ट ने कहा कानूनी पक्षकारों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए मतपत्र आदि जैसे मूल रिकॉर्ड को मंगवाना आवश्यक हो सकता है, इसलिए मामले को हाई कोर्ट की खंडपीठ को सौंपना उचित होगा.
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कोर्ट ने आदेश दिया था कि हम इन याचिकाओं को दिल्ली हाई कोर्ट को हस्तांतरित करते हैं और मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वह इस सप्ताह के भीतर इन्हें एक विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें. कोर्ट ने कहा था कि जब तक हाई कोर्ट फैसला नहीं सुनाता, तब तक मतपत्रों की गिनती स्थगित रखी जाएगी.
विवादों के निपटारे के लिए न्यायाधिकरण का गठन
इससे पहले राज्य बार काउंसिल चुनावों से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस हिमा कोहली की अध्यक्षता में दो चुनाव न्यायाधिकरण गठित करने का आदेश दिया है. यह आदेश विभिन्न राज्यों में बार चुनावों के संचालन से संबंधित मुकदमों में हुई वृद्धि से निपटने के लिए पारित किया गया है.
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