दिल्ली दंगा मामले में कथित आरोपी उमर खालिद ने कड़कड़डूमा कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. जिसपर कोर्ट 22 मई को सुनवाई करेगा. कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. उमर खालिद ने 15 दिन की अंतरिम जमानत की मांग की थी. ताकि वे अपनी बीमार मां की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल कर सकें और दिवंगत चाचा की मौत के बाद चेहलुम अनुष्ठान में शामिल हो सके.
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज समीर बाजपेयी ने कहा अंतरिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि सिर्फ इसलिए कि उमर खालिद और अन्य आरोपियों को पहले अंतरिम जमानत दी जा चुकी है और उन्होंने कभी भी शर्तो का उल्लंघन नहीं किया है. इसका मतलब यह नही है कि जब भी आरोपी जमानत मांगे, तो उसे हर बार जमानत दी जानी चाहिए. इससे पहले कोर्ट ने बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दे चुका है.
UAPA के तहत मामला दर्ज
खालिद को 2020 के दिल्ली दंगों में पीछे कथित बड़ी साजिश के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था. फिलहाल वो जेल में है. इससे पहले 18 अक्टूबर 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज कर दिया था. खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य पर फरवरी 2020 के दंगों के कथित तौर पर मास्टरमाइंड होने के लिए आतंकवाद विरोधी कानून गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे.
बता दें कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी थी. खालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था. 28 मई को ट्रायल कोर्ट ने खालिद की दूसरी बार नियमित जमानत की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि उसकी पहली जमानत याचिका को खारिज करने वाला उसका पिछला आदेश अंतिम हो गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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