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अडानी ग्रुप का ‘मास्टरस्ट्रोक’: विरोचननगर से मुंद्रा पोर्ट तक दौड़ी देश की पहली ‘रीफर कंटेनर ट्रेन’, जानें दुनिया में कैसे पहुंचेगा भारत का फ्रोजन फूड?

अडानी लॉजिस्टिक्स ने भारत के कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई ताकत देते हुए आईसीडी विरोचननगर से मुंद्रा पोर्ट तक पहली रीफर कंटेनर ट्रेन शुरू की है. यह ट्रेन हाइफन फूड्स के फ्रोजन उत्पादों को वैश्विक बाजारों और बड़े ब्रांड्स तक सुरक्षित पहुंचाएगी.

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भारत के कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर (Logistics Sector) में 22 मई 2026 का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के तौर पर दर्ज हो गया है. अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) की लॉजिस्टिक्स इकाई ‘अडानी लॉजिस्टिक्स’ ने भारत से फ्रोजन और जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के निर्यात को रफ्तार देने के लिए अपनी पहली रीफर (Refrigerated) कंटेनर ट्रेन की शुरुआत की है.

हाइफन फूड्स के लिए शुरू की गई यह खास ट्रेन आईसीडी (ICD) विरोचननगर से मुंद्रा पोर्ट के लिए रवाना हो चुकी है. इसे देश में आधुनिक, टिकाऊ और मजबूत कोल्ड चेन नेटवर्क बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग माना जा रहा है.

अडानी ग्रुप की ‘त्रिकोणीय’ साझेदारी

यह पहल अडानी लॉजिस्टिक्स, हाइफन फूड्स और एवरग्रीन मरीन कॉरपोरेशन के बीच एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी का नतीजा है. इस समर्पित रीफर ट्रेन का मुख्य उद्देश्य गर्मी और नमी से खराब हो जाने वाले फ्रोजन उत्पादों को भारत के खेतों और अंदरूनी हिस्सों से निकालकर, एक निश्चित तापमान (Controlled Temperature) पर वैश्विक बाजारों तक सुरक्षित और सुचारु रूप से पहुंचाना है. इससे ट्रांजिट समय (Transit Time) घटेगा और सड़क के बजाय रेल मार्ग का इस्तेमाल होने से प्रदूषण के स्तर में भी भारी कमी आएगी.

दुनिया के बड़े ब्रांड्स तक पहुंचेगा भारत का माल

इस ट्रेन के जरिए भेजा गया उच्च गुणवत्ता वाला फ्रोजन फूड अब सीधे ग्लोबल मार्केट में अपनी धाक जमाएगा. यह सामान मलेशिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचेगा. ये फ्रोजन उत्पाद सीधे पिज्जा हट, बर्गर किंग, टैको बेल, सबवे, आईकिया और KFC जैसे बड़े और प्रतिष्ठित वैश्विक ब्रांड्स की सप्लाई चेन का हिस्सा बनेंगे.

मेगा-पहल का ‘पावरहाउस’

इस पूरी लॉजिस्टिक्स प्रणाली का मुख्य केंद्र आईसीडी विरोचननगर है, जो एक अत्याधुनिक मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब है. यहां से मुंद्रा और पिपावाव बंदरगाहों के लिए सीधा संपर्क है. साथ ही यह घरेलू कार्गो को डंकुनी (पश्चिम बंगाल), जिरानिया (त्रिपुरा) और बाईहाटा (असम) जैसे सुदूर इलाकों से जोड़ता है. इसकी वार्षिक क्षमता 92,400 TEU (Twenty-foot Equivalent Unit) है. यहां 6.6 लाख वर्ग फुट का एक विशाल और आधुनिक वेयरहाउसिंग स्पेस मौजूद है.

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किसानों से लेकर एक्सपोर्टर्स तक को फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी लॉजिस्टिक्स की यह पहल भारत को वैश्विक स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले प्रोसेस्ड फूड्स के एक भरोसेमंद सप्लायर के रूप में स्थापित करेगी. इस ‘इको-फ्रेंडली’ और मल्टीमॉडल नेटवर्क से न केवल देश के निर्यात (Exports) को पंख लगेंगे, बल्कि किसानों से लेकर अंतिम उपभोक्ताओं तक पूरी सप्लाई चेन पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित, कुशल और टिकाऊ बन जाएगी.



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