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‘संत हरिदास के लिए भेष बदलकर आए थे अकबर…’ बांके बिहारी मंदिर केस में SC ने याद दिलाया इतिहास

Banke Bihari Temple Case: वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भीड़ प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. CJI सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि पारंपरिक प्रथाएं जारी रहें, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अब लीक से हटकर सोचना होगा.

CJI Suryakant
Edited by Shubhra Rai

Banke Bihari Temple Case: वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर मामले की सुनवाई के दौरान बांके बिहारी मंदिर में भीड़ प्रबंधन को लेकर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि लीक से हट कर सोचना होगा. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई कर रही है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि प्रारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को बहाल किया जा सकता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका दुरूपयोग न हो.

समय सीमा निर्धारित की जानी चाहिए. ताकि प्रथाएं जारी रहें और लोगों का शोषण न हो सके.

14 गोस्वामी ने आवेदन दिए

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन ने कहा कि समिति में चार गोस्वामी की नियुक्ति के सबंध में, निर्देश था कि दो वर्गों का प्रतिनिधित्व हो, एक शयन भोग से और दूसरा राज भोग से फिर आवेदन आमंत्रित किए गए. 14 गोस्वामी ने आवेदन दिए, जबकि 11 ने इंटरव्यू प्रक्रिया में भाग लिया.

उन 11 में से चार का चयन किया गया. उन चार में से एक व्यक्ति पहले ही गोस्वामी द्वारा एक पूर्व बैठक में अधिकृत किया गया था. अब इन चार व्यक्तियों की नियुक्ति के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई गई है. जहां तक उनके अपने चार प्रतिनिधियों की नियुक्ति की मौजूदा मांग का सवाल है, जिस प्रस्ताव पर वे भरोसा कर रहे हैं, वह इस रिट याचिका के दायर होने से बहुत पहले पारित किया गया था.

मंदिर का निर्माण संत हरिदास ने करवाया

जस्टिस बागची ने कहा कि देखिए तिरुपति में, जगह का फायदा है. वह विशाल है. लेकिन बांके बिहारी मंदिर में संकरी गलियां हैं और यह एक छोटा मंदिर है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जिला गजेटियर के अंग्रेजी अनुवाद में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि मंदिर का निर्माण संत हरिदास ने करवाया था. इसमें कोई संदेह नहीं है.

मंदिर के लिए भूमि मांगी

लेकिन क्या आप सभी जानते है कि उस गजेटियर में इस बात का उल्लेख नहीं है कि जब अकबर संत हरिदास के दर्शन करने आए थे, तब वे भगवान कृष्ण के भक्ति गीत गा रहे थे. तान सेन के साथ भेष बदलकर आए अकबर को यह देखकर प्रसन्नता हुई और उन्होंने संत हरिदास को पुरस्कार देने की पेशकश की.

दृष्टिहीन संत हरिदास ने कहा कि उन्हें अपने लिए कुछ नहीं चाहिए और इसके बाद उन्होंने मंदिर के लिए वह भूमि मांग ली. दृष्टिहीन होने के बावजूद वह जानते थे और यह अकबर ही हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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