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‘राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर नहीं छीन सकते निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार’, रिटायर्ड मेजर जनरल के केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरोपी को चार्जशीट का हिस्सा रहे दस्तावेज़ों तक पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा करना उसके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है.

SUPREME COURT

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला देते हुए कहा है कि आरोपी को चार्जशीट का हिस्सा रहे दस्तवेज़ों तक पहुंच से वंचित नही जा सकता है. क्योंकि ऐसा करने से उसके निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को गंभीर नुकसान पहुच सकता है. जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने यह फैसला दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त मेजर जनरल वीके सिंह को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम से जुड़े मामले में कुछ गोपनीय दस्तावेजों की टाइप की हुई प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों को रोकना आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 21का हिस्सा है, इस्तेमाल अदालत में उसके खिलाफ किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई किसी भी आरोपी का बुनियादी अधिकार है. यदि उसे यह ही नही बताया जाएगा कि उसके खिलाफ कौन से दस्तावेज और सबूत इस्तेमाल किए जा रहे है, तो वह अपना बचाव कैसे करेगा.

CrPC धारा 207 के तहत मांगे गए दस्तावेजों को लेकर विवाद

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके नाम पर आरोपी के कानूनी अधिकार खत्म नही किए जा सकते. मेजर जनरल वीके सिंह 1923 के आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत 2007 में दर्ज एक मामले में अभियोजन का सामना कर रहे हैं. हाई कोर्ट ने निचली अदालत के दिसंबर 2009 के उस आदेश में संशोधन किया था, जिसमें अभियोजन पक्ष को सिंह द्वारा मांगे गए दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था. सिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 207 के तहत अधीनस्थ अदालत में आवेदन दाखिल कर अभियोजन पक्ष को कुछ ऐसे दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया था, जो चार्जशीट का हिस्सा थे, लेकिन उन्हें नहीं दिए गए थे.

वीके सिंह ने रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने “इंडियाज एक्सटर्नल इंटेलिजेंस: सीक्रेट्स ऑफ रिसर्च एंड एनालिसिस विंग” नाम से एक किताब लिखी. जिसके बाद इसी किताब को लेकर विवाद शुरू हुआ.

किताब में गोपनीय जानकारी प्रकाशित करने का आरोप

जांच एजेंसियों का आरोप है कि किताब में कई ऐसी जानकारियां प्रकाशित की गई जो गोपनीय श्रेणी में आती थी. आरोप के अनुसार किताब में कुछ अधिकारियों के नाम, उनकी नियुक्तियां, स्टेशन कोड, तकनीकी परियोजनाओं की जानकारी, दूरसंचार इकाइयों के कामकाज और सिग्नल इंटेलिजेंस से जुड़ी जानकारियां शामिल थी.वी. के सिंह भारतीय सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल हैं और नवंबर 2000 से जून 2004 तक कैबिनेट सचिवालय में जॉइंट सेक्रेटरी के तौर पर भी काम कर चुके हैं.

उनपर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923 की धारा 3/5 और भारतीय दंड संहिता 1860 (आईपीसी) की धारा 409, अनुच्छेद 120B के तहत मामला दर्ज किया गया.

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-भारत एक्सप्रेस



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