पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील ने अदालत से कहा कि यह मामला देश में सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका का निपटारा कर दिया है.
कार्रवाई न हो तभी खटखटाए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
सुनवाई के दौरान जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने पूछा कि क्या इस संबंध में पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई गई है. उन्होंने कहा कि कानून के तहत पहले उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि यदि निचले स्तर पर कार्रवाई नहीं होती तभी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए. जस्टिस अमानुल्लाह ने यह भी कहा कि हर मामले सीघे सुप्रीम कोर्ट लाने की प्रवृति ठीक नही है.
नीचली अदालतों की भूमिका होगी प्रभावित
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने याचिकाकर्ता से कहा कि हमारी व्यवस्था पर भरोसा रखिये. अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ी अदालत है और उसकी भूमिका निगरानी की है. यदि हर मामले सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाया जाएगा तो निचली अदालतों की भूमिका प्रभावित होगी.
उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील घटनाओं को सनसनीखेज बनाने से बचना चाहिए. यदि किसी व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
क्या था मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, नाजिया इलाही खान ने जून में एक पॉडकास्ट के दौरान पैगंबर मोहम्मद और उनके परिवार के खिलाफ कुछ अपमानजनक टिप्पणियां की थी. जिसके बाद इसकी क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. घटना सामने आने के बाद इंफ्लुएंसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.
मामले को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम सौंपे गए ज्ञापन में संबंधित व्यक्ति की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच तथा कानून के अनुरूप सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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