SC on Cow Slaughter in Tamil Nadu: देश की सर्वोच्च अदालत से आज यानी 13 जुलाई 2026 को एक बहुत बड़ी और दूरगामी कानूनी खबर सामने आई है. सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में गौहत्या पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने वाले मद्रास हाई कोर्ट के पिछले आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. मद्रास हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में पूरे राज्य के भीतर किसी भी दिन गायों और बछड़ों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया था.
सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा रुख के बाद अब राज्य में हाई कोर्ट का वह सख्त निर्देश फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा. देश के कानूनी और सियासी गलियारों में इस फैसले को राज्यों के विधायी अधिकारों और अदालती क्षेत्राधिकार की बहस के रूप में देखा जा रहा है.
जस्टिस संदीप मेहता की पीठ का बड़ा एक्शन(SC on Cow Slaughter in Tamil Nadu)
आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार की विशेष अनुमति याचिका पर विस्तृत सुनवाई की. राज्य सरकार की दलीलों और कानूनी बारीकियों को सुनने के बाद पीठ ने इस मामले में मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने साफ किया कि अगली सुनवाई होने तक मद्रास हाई कोर्ट द्वारा पूरे राज्य में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाले फैसले के क्रियान्वयन और उसके प्रभाव पर पूरी तरह से रोक रहेगी. अब सर्वोच्च न्यायालय ही अंतिम सुनवाई में यह तय करेगा कि हाई कोर्ट का वह फैसला संविधान के दायरे में था या नहीं.
मद्रास हाई कोर्ट के दायरे से बाहर जाने की दलील
सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी याचिका में तमिलनाडु सरकार ने बेहद मजबूत कानूनी दलीलें पेश कीं. सरकारी वकीलों ने कोर्ट को बताया कि मद्रास हाई कोर्ट के सामने जो मूल याचिका दायर की गई थी, उसका दायरा बेहद सीमित था. वह याचिका केवल बकरीद के त्योहार के मौके पर वैध बूचड़खानों के बाहर सार्वजनिक स्थानों पर गायों और बछड़ों की कथित तौर पर दी जाने वाली बलि के मुद्दे तक ही सीमित थी.
सरकार का आरोप है कि हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मूल याचिका के तय दायरे से काफी आगे बढ़कर अपनी तरफ से पूरे राज्य में हर दिन के लिए गायों की हत्या पर मुकम्मल बैन लगाने का हुक्म सुना दिया, जो न्यायशास्त्र के सिद्धांतों और तय कानून के मुताबिक बिल्कुल सही नहीं है.
10 साल से अधिक आयु के गोवंश पर क्या है कानून?
तमिलनाडु सरकार ने देश के संघीय ढांचे और राज्यों के पशुपालन नियमों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य के मौजूदा कानूनों और नियमों के मुताबिक 10 वर्ष से अधिक आयु के गोवंश की हत्या पर कानूनी रूप से कोई पाबंदी नहीं है.
हाई कोर्ट ने राज्य के इस वैधानिक अधिकार और नियमों की अनदेखी करते हुए अनुच्छेद 48 का हवाला देकर एकतरफा आदेश पारित कर दिया था. सरकार का कहना है कि जब राज्य का अपना एक कानून पहले से मौजूद है, तो अदालत को उसमें इस तरह पूरी तरह हस्तक्षेप करके नया नियम लागू नहीं करना चाहिए. इसी दलील को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर तुरंत ब्रेक लगा दिया.
बकरीद से ठीक पहले बढ़ी सियासी तपिश
इस पूरे कानूनी विवाद(Supreme Court on Cow Slaughter) की शुरुआत इसी साल 27 मई को मद्रास हाई कोर्ट द्वारा दिए गए एक आदेश से हुई थी. तब हाई कोर्ट ने भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के तहत आने वाले अनुच्छेद 48 और साल 1976 में तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी किए गए एक पुराने प्रशासनिक आदेश का संदर्भ देते हुए राज्य प्रशासन को सख्त निर्देश दिया था कि बकरीद सहित साल के किसी भी दिन राज्य के भीतर गायों और बछड़ों की हत्या न होने दी जाए.
इस आदेश के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर बहस छिड़ गई थी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद यह मामला एक बार फिर कानूनी समीक्षा के अधीन आ गया है और अगली सुनवाई तक राज्य में यथास्थिति बनी रहेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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