सुप्रीम कोर्ट के भीतर लाइव सुनवाई के दौरान अभूतपूर्व हंगामा करने, फाइलें फेंकने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने के मामले में गिरफ्तार दोनों मुख्य आरोपियों— प्रबल प्रताप सिंह और चंदर भान को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (जुडिशियल कस्टडी) में जेल भेज दिया है.
सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने, अदालती कार्यवाही में गंभीर बाधा डालने, ऑन-ड्यूटी सरकारी कर्मचारी के काम में रुकावट पैदा करने और मौके पर मुस्तैद सुरक्षा कर्मियों के साथ तीखी धक्कामुक्की व अभद्रता करने के संगीन आरोपों में दोनों को गिरफ्तार किया था. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, ये दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश (UP) के मूल निवासी हैं और वर्तमान में कानून (लॉ) की पढ़ाई कर रहे हैं.
आरोपियों की दो दिन की पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें पटियाला हाउस कोर्ट के समक्ष पेश किया गया था, जहां से कोर्ट ने उन्हें आगामी 29 जुलाई 2026 तक के लिए जेल भेज दिया.
कोर्ट रूम में मचे बवाल की पूरी क्रोनोलॉजी
यह हैरान कर देने वाला पूरा वाकया सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ के समक्ष देखने को मिला, जब अदालत में इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही थी. याचिकाकर्ता खुद इन-पर्सन (अपने केस की पैरवी स्वयं) कोर्ट रूम में बहस कर रहा था. मामले की सुनवाई जैसे ही शुरू हुई, याचिकाकर्ता ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए पीठ से कहा-
“मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट (न्यायिक सेवक), मैं आपको यह ऑर्डर देता हूँ कि आप एसीपी (ACP) लखनऊ के खिलाफ तुरंत आपराधिक एफआईआर दर्ज करने का ऑर्डर देने का ऑर्डर जारी करें.”
याचिकाकर्ता के इस अप्रत्याशित और अमर्यादित बर्ताव को देखकर खुली अदालत में मौजूद जज और वकील पूरी तरह हैरान रह गए. इसके तुरंत बाद पीठ के सदस्य जस्टिस केवी विश्वनाथन ने पूछा, “क्या आप मुझे ऑर्डर दे रहे हैं? क्या आप हमें (अदालत को) ऑर्डर दे रहे हैं?”
इसके जवाब में अहंकार दिखाते हुए उस शख्स ने कहा, “मेरी तरफ से बस इतना ही, सब कुछ रिकॉर्ड में है.” इतना कहते ही उस व्यक्ति ने जज की पीठ (डायस) की तरफ अपने केस की भारी फाइल को हवा में उछाल दिया और खुली अदालत में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ बेहद अभद्र गालियां देनी शुरू कर दीं. उसने कोर्ट रूम में अन्य पेपर भी हवा में फेंकते हुए चिल्लाकर कहा कि “इसे ले जाकर सीजेआई को दे देना.” इस अप्रत्याशित हमले के तुरंत बाद कोर्ट रूम में तैनात सुरक्षा कर्मी हरकत में आए और उस व्यक्ति को बलपूर्वक पकड़कर तुरंत कोर्ट रूम से बाहर ले गए, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर लगातार पूछताछ की थी.
सस्ती लोकप्रियता का स्टंट
इस बेहद गंभीर और अवमाननाकारी घटना के बाद तकनीकी रूप से सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार (Registrar) की ओर से इस दुर्व्यवहार करने वाले मूल याचिकाकर्ता के खिलाफ एक कड़ी और नियमित एफआईआर दर्ज कराई जा सकती थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट प्रशासन और सीजेआई द्वारा इस मामले में कोई भी प्रतिशोध या दंडात्मक कदम नहीं उठाने का एक बेहद संवेदनशील और विचारणीय फैसला लिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट की उच्च पीठ का यह स्पष्ट मानना है कि अक्सर कुछ लोगों द्वारा कोर्ट रूम के भीतर ऐसी हिंसक और अशोभनीय घटनाओं को महज ‘सस्ती लोकप्रियता’ (चीप पब्लिसिटी) पाने के एक सोचे-समझे स्टंट के तहत अंजाम दिया जाता है. ऐसे में यदि कोर्ट या पुलिस इस पर कोई बड़ा दंडात्मक कदम उठाती है, तो संबंधित विवादित व्यक्ति सोशल मीडिया और खबरों में आकर अपने इस नकारात्मक मकसद में पूरी तरह कामयाब हो जाएगा.
रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जब देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को कोर्ट रूम में घटित हुए इस पूरे दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी दी गई, तो सीजेआई सूर्यकांत ने भी परिपक्वता दिखाते हुए निर्देश दिया कि संस्था की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इस मामले में आगे कोई दंडात्मक कदम न बढ़ाया जाए.
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