जयपुर के एसएमएस अस्पताल में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक युवक को नई उम्मीद दी है. करीब 40 दिनों तक चले इलाज के बाद डॉक्टरों ने ना सिर्फ युवक के कटे हुए निजी अंग को दोबारा जोड़ दिया, बल्कि उसकी सामान्य कार्यक्षमता भी वापस लाने में सफलता हासिल की है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 31 मई का है. जयपुर में रहने वाले एक 29 साल के युवक पर उसकी प्रेमिका ने अचानक ब्लेड से जानलेवा हमला कर दिया था. इस हमले में युवक का प्राइवेट पार्ट पूरी तरह कट गया था. खून से लथपथ युवक दर्द से कराह रहा था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी. वारदात के करीब 4 घंटे के भीतर ही उसे जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों का कहना है कि यही 4 घंटे उस युवक के लिए ‘गोल्डन आवर्स’ साबित हुआ. अगर अस्पताल पहुंचने में थोड़ी भी और देरी होती, तो शायद यह चमत्कार मुमकिन नहीं हो पाता.
मरीज की गंभीर हालत को देखते ही एसएमएस अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की टीम तुरंत एक्शन में आ गई. उसी रात डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और लंबी माइक्रो सर्जरी शुरू की. डॉक्टरों के सामने चुनौती सिर्फ कटे हुए हिस्से को वापस जोड़ने की नहीं थी, बल्कि सबसे बड़ा टास्क यह था कि वह अंग भविष्य में सामान्य रूप से काम कर सके.
इस ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने बेहद बारीकी से काम किया. उन्होंने क्षतिग्रस्त यूरिन पाइप (मूत्रमार्ग), स्पॉन्जियोसम और कॉर्पोरा जैसी अत्यंत संवेदनशील और महीन नसों को एक-एक करके जोड़ा गया. यह काम इतना पेचीदा था कि जरा सी भी चूक सब कुछ बर्बाद कर सकती थी.
40 दिन का इंतजार और डॉक्टरों की बड़ी जीत
सफल ऑपरेशन के बाद असली परीक्षा शुरू हुई. युवक को करीब 40 दिनों तक डॉक्टरों की स्पेशल निगरानी में रखा गया. रोज उसकी ड्रेसिंग और रिकवरी को मॉनिटर किया जाता था. आखिरकार डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई.
अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक,
“मरीज अब पूरी तरह से ठीक हो चुका है. वह सामान्य रूप से यूरिन पास कर पा रहा है और उसके जननांग की कार्यक्षमता भी पूरी तरह से बहाल हो चुकी है. वह अब एक सामान्य जिंदगी जी सकता है.”
एसएमएस अस्पताल के डॉक्टरों ने इस कामयाबी को प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी उपलब्धि बताया है. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि प्लास्टिक सर्जरी का मतलब सिर्फ चेहरा सुंदर बनाना या कॉस्मेटिक सर्जरी होता है. लेकिन डॉक्टरों ने साफ किया कि यह मेडिकल साइंस की वो शाखा है जो किसी हादसे, गंभीर चोट, कैंसर या जन्मजात विकृति के शिकार लोगों को एक नया आत्मसम्मान और सामान्य जिंदगी जीने का हक देती है. इस मामले में भी डॉक्टरों ने न सिर्फ एक युवक का अंग बचाया, बल्कि उसे डिप्रेशन और एक दर्दनाक भविष्य से भी बचा लिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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