Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद में चार साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में तल्ख टिप्पणी की है. अदालत ने उन निजी अस्पतालों को फटकार लगाई है, जिन पर गाजियाबाद में रेप और हत्या की शिकार 4 साल की बच्ची को शुरुआती इलाज ना देने का आरोप है.
नाम के साथ ‘डॉक्टर’ लिखने का हक नहीं
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है. सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा अगर आप अपनी डियूटी नहीं निभाते हैं, तो आपको अपने नाम के साथ ‘डॉक्टर’ लिखने का कोई हक नहीं है. कोर्ट ने कहा कि अगर आपमें थोड़ी भी संवेदनशीलता होती तो सुविधा न होने पर भी आप उस बच्ची को दूसरे अस्पताल में ले जाते. क्या आपने इसलिए उसे नजर अंदाज किया वह गरीब थी? क्या वह आपकी फीस नहीं दे सकती थी?
डीजीपी को एसआईटी का गठन करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों से कहा कि वे पीड़ित परिवार की मदद के लिए अपनी मर्जी से दान दें, वरना उसपर जुर्माना लगाया जाएगा. इससे पहले कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को एसआईटी का गठन करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था एसआईटी में उत्तर प्रदेश कैडर की सीपी/आईजीआई रैंक की एक महिला पुलिस अधिकारी शामिल हो, जिसका राज्य से कोई संबंध न हो, एसपी रैंक का एक अधिकारी, एक महिला डीएसपी या पुलिस इंस्पेक्टर हों.
प्रजापति नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया
पिछली सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आरोपित अपराध का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह दो कथित निजी अस्पतालों और स्थानीय पुलिस के पूरी तरह उदासीन और असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कोर्ट को बताया था कि पुलिस लगातार पीड़िता के पिता को प्रताड़ित कर रही है. उन्होंने कहा था कि घटना के एक दिन बाद एफआईआर दर्ज किया गया है.
उन्होंने कहा था कि मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है. पुलिस के मुताबिक इस मामले में गौरव प्रजापति नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. क्योंकि परिजनों ने उसपर शक जताया था. अभी तक के जांच में पता चला है कि दरिंदे ने बच्ची के शरीर पर कनपटी, कमर और कई जगह चोट पहुचाई है. बच्ची को काटा गया है. यहां तक कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट से भी अधिक ब्लीडिंग हुई है. बच्ची शाम 6 बजे घर से खेलते हुए लापता हो गई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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