Bharat Express DD Free Dish

NEET में आया 650 या 700+ का स्कोर? जानिए किस सरकारी मेडिकल कॉलेज में मिल सकता है दाखिला

NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों के बीच सरकारी MBBS सीटों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. 550 से लेकर 700+ अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों के लिए किन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की क्या संभावनाएं है और काउंसलिंग के दौरान किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है, जानिए इस रिपोर्ट में.

NEET UG Result 2026, Medical College, Education

NEET UG 2026 Cut-Off: री-नीट 2026 का रिजल्ट सामने आने के बाद अब देश भर के लाखों छात्रों और उनके पेरेंट्स के दिमाग में बस एक ही सवाल घूम रहा है, “क्या इतने स्कोर पर सरकारी कॉलेज में MBBS की सीट मिल पाएगी?” हर साल की तरह इस बार भी मेडिकल सीटों के लिए मारामारी और कंपटीशन का लेवल काफी हाई है. अगर आपने भी परीक्षा दी है और आपका स्कोर 550 से 700 के बीच आ रहा है, तो चलिए समझते हैं कि आपके नंबरों के हिसाब से कौन सा कॉलेज मिलने की सबसे ज्यादा उम्मीद है.

जब स्कोर हो 700 से ऊपर

यदि आपके नंबर 700 या उससे ज्यादा आ रहे हैं तो आप सबसे सुरक्षित स्थिति में हैं. इस बेहतरीन स्कोर के साथ देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों के दरवाजे आपके लिए खुले हैं. आपको AIIMS New Delhi, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC), वीएमएमसी (VMMC), जिपमेर पुडुचेरी और केजीएमयू लखनऊ जैसे टॉप कॉलेजों में आसानी से सीट मिल सकती है.

650+ अंक वाले छात्र

जिन छात्रों का स्कोर 650 से 699 के बीच है वे भी काफी फायदे में रहने वाले हैं. इस रेंज में ऑल इंडिया कोटा के जरिए कई शानदार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिल जाता है. इसके अलावा देश में खुले कुछ नए एम्स कैंपस में भी इस स्कोर पर एडमिशन की अच्छी संभावना बनी रहती है.

600+ स्कोर

अगर आपका स्कोर 600 के पार है तो सरकारी कॉलेज से MBBS करने का आपका सपना बिल्कुल पूरा हो सकता है. हालांकि इस स्कोर पर टॉप टेन कॉलेजों या एम्स दिल्ली की उम्मीद करना मुश्किल होगा लेकिन स्टेट कोटा के तहत राज्यों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आराम से सीट मिल जाती है. अगर आप किसी आरक्षित वर्ग से आते हैं तो इस स्कोर पर आपके लिए मौके और ज्यादा बेहतर हो जाते हैं.

550+ अंक वाले छात्र

550 से ज्यादा नंबर लाने वाले जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए राह थोड़ी मुश्किल और सस्पेंस से भरी होती है. यहां आपकी किस्मत पूरी तरह से आपके राज्य और काउंसलिंग के ट्रेंड पर टिकी होती है. जिन राज्यों में मेडिकल का कट-ऑफ थोड़ा कम जाता है वहां स्टेट कोटा से सीट मिलने की उम्मीद रहती है. लेकिन हाई-कंपटीशन वाले राज्यों में सामान्य वर्ग के लिए यह स्कोर थोड़ा कम पड़ जाता है.

ये भी पढ़ें- NEET UG परीक्षा में तो हो गए पास, अब आगे क्या करें? यहां समझे पूरा प्रोसेस और जरूरी नियम

कैसे तय होता है कॉलेजों का कट-ऑफ?

सरकारी मेडिकल कॉलेज की कट-ऑफ लिस्ट हर साल एक जैसी नहीं रहती. यह मुख्य रूप से कुछ जरूरी बातों पर निर्भर करती है. सबसे पहले इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि इस बार परीक्षा का पेपर कितना कठिन या आसान था. साथ ही कुल कितने छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया. इसके अलावा कई और बातें भी हैं जिन पर कट-ऑफ निर्भर करती है:

देश भर में इस साल एमबीबीएस (MBBS) की कितनी सीटें बढ़ी हैं.

कैटेगरी के हिसाब से आरक्षण के क्या नियम हैं.

ऑल इंडिया बनाम स्टेट कोटा की काउंसलिंग का ट्रेंड क्या है.

काउंसलिंग के समय न करें ये गलतियां

नंबर आने के बाद असली खेल काउंसलिंग का होता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि छात्रों को मेडिकल काउंसलिंग कमेटी और अपने राज्य की आधिकारिक वेबसाइट्स के टच में रहना चाहिए. ध्यान रखें कि काउंसलिंग के हर राउंड में सीटें बदलती हैं क्योंकि बहुत से छात्र अपग्रेडेशन का विकल्प चुनते हैं या सीटें छोड़ देते हैं. इसलिए चॉइस फिलिंग बहुत सोच-समझकर करें अपने सारे जरूरी डॉक्यूमेंट्स पहले से ही रेडी रखें और किसी भी राउंड की काउंसलिंग में भाग लेने का मौका हाथ से न जाने दें.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read