Kiren Rijiju
Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले केंद्र सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण और प्रभावी ढंग से चलाने की अपील की है. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार (19 जुलाई) को साफ शब्दों में कहा कि संसद में लगातार हंगामा करने या कार्यवाही बाधित करने से किसी भी राजनीतिक दल को कोई फायदा नहीं होता. इसके उलट इससे जनता का समय और टैक्स का पैसा दोनों बर्बाद होते हैं.
सत्र शुरू होने से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक
मानसून सत्र की शुरुआत से पहले सरकार ने संसद भवन एनेक्सी में सभी राजनीतिक दलों के फ्लोर नेताओं की बैठक बुलाई. बैठक का उद्देश्य आगामी सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों के बीच सहमति और सहयोग का माहौल बनाना था. इस दौरान सरकार ने विपक्ष सहित सभी दलों से रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की.
बैठक से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे देश की संस्था है. इसलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सदन में अपनी भूमिका निभाएं.
संसद में बहस हो, लेकिन काम भी चले
रिजिजू ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां हर निर्वाचित सांसद को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार स्वस्थ और गंभीर बहस का स्वागत करती है. किसी भी मुद्दे पर असहमति होना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसका समाधान चर्चा के जरिए होना चाहिए, न कि सदन की कार्यवाही रोककर.
उन्होंने कहा कि संसद का असली उद्देश्य देश से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श करना, कानून बनाना और सरकार को जवाबदेह बनाना है. अगर बार-बार हंगामे की वजह से सदन नहीं चल पाता, तो इसका नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ता है.
‘हंगामे से नहीं मिलता राजनीतिक लाभ’
पिछले कुछ संसदीय सत्रों का जिक्र करते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि बार-बार कार्यवाही बाधित होने की घटनाएं सभी ने देखी हैं. उनका कहना था कि अब यह साफ हो चुका है कि केवल हंगामा करने से किसी दल को राजनीतिक फायदा नहीं मिलता. जनता भी चाहती है कि उसके चुने हुए प्रतिनिधि संसद में गंभीर चर्चा करें और जनहित के मुद्दों का समाधान निकालें.
उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि वे विरोध दर्ज कराने के लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करें. अगर किसी विषय पर मतभेद हैं, तो उन्हें सदन के भीतर बहस के जरिए रखा जाए, ताकि लोकतंत्र की गरिमा भी बनी रहे और संसद का काम भी प्रभावित न हो.
सरकार भी सुनेगी विपक्ष की बात
रिजिजू ने भरोसा दिलाया कि सरकार विपक्ष की बात सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है. साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष भी सरकार का पक्ष धैर्यपूर्वक सुनेगा. उनके अनुसार लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात सुनें और सार्थक चर्चा के जरिए आगे बढ़ें.
उन्होंने यह भी कहा कि संसद का हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है. यदि कार्यवाही बाधित होती है, तो न केवल जरूरी विधेयकों पर चर्चा प्रभावित होती है, बल्कि सरकारी संसाधनों और जनता के पैसे की भी अनावश्यक बर्बादी होती है.
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20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा. लगभग चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं. इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और अन्य जरूरी सरकारी कामकाज सदन के सामने रखेगी. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि सभी राजनीतिक दल सहयोग करें, ताकि संसद की कार्यवाही बिना किसी बड़े व्यवधान के चल सके और देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक निर्णय लिए जा सकें.
-भारत एक्सप्रेस
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